श्रीलक्ष्मी नारायण मंदिर में निर्जला एकादशी पर हुई पूजा अर्चना
May 31 2023
ग्वालियर। जनक गंज स्थित श्रीलक्ष्मी नारायण मंदिर मैं निर्जला एकादशी मनाई गई जोकि भीमसेन एकादशी के नाम से भी जानी जाती है हिंदू धर्म में इस एकादशी के व्रत बेहद ही खास माना गया है जो कि भगवान विष्णु की पूजा अर्चना को समर्पित है इस दिन भक्त दिनभर उपवास रखकर श्रीहरि की पूजा करते हैं। यह एकादशी जगत के पालनहार भगवान विष्णु को बेहद प्रिय है। 31 मई बुधवार को निर्जला एकादशी के अवसर पर श्रीलक्ष्मी नारायण मंदिर पर सैकड़ों भक्तों ने मंदिर पहुंचकर भगवान श्री की पूजा अर्चना कर निर्जला एकादशी पर्व मनाया गया इस अवसर पर भक्तों ने भगवान को ठंडे जल पात्र हाथ के पंखे सुराई फल अर्पित किए भगवान से अपने परिवार की सुख समृद्धि की कामना की धर्म आचार्यों का मानना है कि साल में कुल 24 एकादशी पढ़ती हैं। जिसमें सबसे अधिक महत्व निर्जला एकादशी का होता है जो भीमसेन एकादशी के नाम से जानी जाती है।
इस एकादशी पर श्रद्धालु दिन भर पानी पिए बिना इस व्रत को रखते हैं और भगवान विष्णु को पूजते हैं। मंदिर के पुजारी राघवेश लव्हाटे ने बताया है कि निर्जला एकादशी के व्रत रखने से चारों धाम के तीर्थ का फल भी मिलता है लोगों में यह भी मान्यता है कि यह व्रत रखने से मरने के बाद भगवान विष्णु के पास बैकुंठ धाम में रहने का मौका मिलता है जिससे सारे पाप दूर होते हैं। साथ ही जीवन के अंतिम समय में किसी भी तरह का मानसिक बताएं कष्ट नहीं होता है इस व्रत के द्वारा भगवान विष्णु को प्रसन्न किया जाता है जिससे मोक्ष की प्राप्ति होती है बिना जल आहार के ग्यारस को निर्जला भीमसैन ग्यारस कहते हैं।
निर्जला एकादशी का विशेष महत्व है बाकी एकादशी से यह सबसे ज्यादा मुश्किल वक्त भी है योंकि यह बिना आहार और पानी के रखा जाता है कहते हैं कि अगर कोई साल भर में बाकी 23 एकादशी का व्रत ना करें लेकिन सिर्फ यह एकादशी को पूरी श्रद्धा भक्ति भाव से नियम अनुसार रखे तो इसे बाकी एकादशी का फल भी मिल जाता है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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