ग्वालियर में गोडसे की जयंती पर बवाल, फोर्स तैनात

May 19 2023

ग्वालियर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की जयंती पर एक बार फिर बवाल खड़ा हो गया है। 19 मई शुक्रवार को गोडसे की 114वीं जयंती पर हिंदू महासभा उनकी तस्वीर का पूजन कर समाज सेवा का कार्यक्रम शुरू करती उससे पहले ही पुलिस ने एन्ट्री मार दी। पुलिस ने हिंदू महासभा के सदस्यों से जबरन गोडसे की तस्वीर छीन ली। इतना ही नहीं उनको कोई कार्यक्रम नहीं करने दिया गया। इस दौरान पुलिस और हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं में बहस और झूमा झटकी भी हुई है। यह पूरा घटनाक्रम ग्वालियर के इंदरगंज स्थित गैंडेवाली सडक़ जलाल खां की गोठ काली माता मंदिर का है। हिंदू महासभा का दावा है कि उन्होंने गोडसे की जयंती बनाकर कार्यक्रम किए बस्ती में फल वितरण किया, जबकि पुलिस का कहना है कि हमने कोई कार्यक्रम नहीं होने दिया है।
ग्वालियर में 19 मई शुक्रवार को महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की 114वीं जयंती के अवसर पर हिंदू महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. जयवीर भारद्वाज ने सात दिन पहले ही घोषणा की थी, कि गोडसे की जयंती पर शुक्रवार को वह कार्यक्रम कर लोगों में फल वितरित करेंगे। साथ ही देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर गोडसे की मूर्ति देश में जगह-जगह लगाने की घोषणा करने का ऐलान किया था।
शुक्रवार सुबह से ही हिंदू महासभा भवन पर पुलिस का पहरा था। जिसके बाद हिमस ने यह कार्यक्रम इंदरगंज स्थित गैंडेवाली सडक़ जलाल खां की गोठ में काली माता मंदिर पर रखा था। पर जैसे ही गोडसे की तस्वीर लेकर हिंदू महासभा के जिलाध्यक्ष लोकेश अपने कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे तो वहां पुलिस फोर्स पहुंच गया। पुलिस ने रास्ते में ही तस्वीर को जबरन छीन लिया।
जब गोडसे की तस्वीर को छीनने का प्रयास किया तो हिमस कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया और बहस की। जवाब में पुलिस ने जबरन गोडसे की तस्वीर उनसे छीन ली और उसे थाने में ले जाकर रख दिया। हिमस कार्यकर्ता जलाल खां की गोठ में गोडसे की तस्वीर रखकर पूजा अर्चना कर जयंती मनाने का प्रयास कर रहे थे।
पुलिस का दावा है कि हिमस को कोई भी अनैतिक कार्यक्रम नहीं करने दिया गया है, जबकि हिमस के डॉ भारद्वाज ने कहा है कि हमने जिस कार्यक्रम की घोषणा की थी वह किया है। गोडसे की 114वीं जयंती मनाई गई है और बस्तियों में फलों का वितरण किया गया है।
हिंदू महासभा ने कहा कि गोडसे ने देश के विभाजन का प्रतिकार किया था। इसलिए हमने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि देश में विभिन्न स्थानों पर नाथूराम गोडसे की मूर्ति लगवाने की इजाजत दी जाए। युवा भी जान सकें कि नाथूराम गोडसे की विचारधारा क्या थी। अभी तक किसी को भी सही जानकारी ही नहीं है।
बताया जाता है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या में उपयोग की गई पिस्तौल ग्वालियर रियासत के टाइम पर खरीदी गई थी। हत्या से पहले तीन दिन नाथूराम गोडसे, नारायण आप्टे ग्वालियर में हिंदू महासभा के गढ़ में ही ठहरे थे। यहां स्वर्ण रेखा नदी के किनारे उन्होंने पिस्तौल साधना और निशाना लगाने की प्रैक्टिस की थी। यहीं से एक दिन पहले वह दिल्ली पहुंचे और महात्मा गांधी की हत्या को अंजाम दिया था। यही कारण है कि हिमस गोडसे को यहां पूजती है। उनका मानना है कि विभाजन का कारण महात्मा गांधी थे और गोडसे ने उसके प्रतिकार के रूप में यह कदम उठाया।