दो शस्त्र लाइसेंस और 24 घंटे सुरक्षा देने के आश्वासन के बाद परिजनों ने किया अंतिम संस्कार

May 06 2023

ग्वालियर। मुरैना के लेपा गांव में शुक्रवार को हुए हत्याकांड ने सबको दहला दिया। यहां 10 साल पुराने विवाद के चलते एक ही परिवार के 6 लोगों की हत्या कर दी गई। परिजन ने शवों का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। उनकी मांग थी कि उन्हें लाइसेंसी बंदूक दी जाए, आरोपियों के घर तोड़े जाएं। साथ ही पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाए। काफी समझाइश के बाद भी परिजन अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए। पुलिस ने हत्या के दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। फरार 7 आरोपियों पर 10-10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है।
शवों को एम्बुलेंस में ही श्मशान घाट ले जाया गया। अंतिम संस्कार के लिए यात्रा भी नहीं निकाली गई। परिवार को कुछ देर के लिए शवों को देखने की इजाजत मिली। हिंदू मान्यताओं के अनुसार घर पर जो अंतिम क्रियाएं होती हैं, उसे भी नहीं की गई।
एसपी चौहान ने कहा कि शस्त्र के लिए परिवार में जो भी पात्र होगा, उसे शस्त्र मिल जाएंगे। इसके आधार पर दो लोगों को शस्त्र दिए जाएंगे। साथ ही सुरक्षा के लिए चार आरक्षक और एक हेड कॉन्स्टेबल की नियुक्ति होगी, जो पाली के हिसाब से 24 घंटे परिवार के साथ होंगे। घर तोडऩे की मांग पर एसडीएम एलके पांडे ने कहा कि घर तोडऩे को लेकर आरोपियों के परिवार को नोटिस दिया गया है।
पुलिस ने दो आरोपी धीरसिंह तोमर और राजूसिंह तोमर को गिरफ्तार किया। इस मामले में कुल 9 आरोपी हैं। 7 आरोपी अभी फरार हैं। पुलिस ने सभी 7 फरार आरोपियों पर 10-10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है।
गोलीकांड के बाद से ही गांव में भारी पुलिस बल तैनात है। दूसरे दिन शनिवार को गांव की हर गली में रिजर्व फोर्स के जवान तैनात था। पुलिस गत शुक्रवार की देर शाम को शवों के पोस्टमॉर्टम के बाद शव गांव लेकर पहुंच चुकी थी, लेकिन परिजन ने शव लेने से मना कर दिया था। इसके बाद पुलिस ने शवों को एम्बुलेंस में रखकर गांव की स्कूल में ही रात गुजारी। इस दौरान पुलिस ने परिजन को मनाने का काफी प्रयास किया। इसके बाद पुलिस के आला अधिकारी वापस मुरैना लौट गए और सुबह होते ही वापस मोर्चा संभाला। अफसरों ने पुन: समझाइश दी। इसके बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए।
2013 में कचरा फेंकने से शुरू हुआ विवाद
मुरैना जिले के बागी पानसिंह तोमर के भिड़ौसा गांव से सटा लेपा गांव चर्चा में है। यहां 10 साल पहले दो पक्षों में कचरा फेंकने को लेकर विवाद हुआ था। इस विवाद में दो लोगों की हत्या कर दी गई। अब इसका बदला 6 लोगों के खून से लिया गया। शुक्रवार को ताबड़तोड़ गोलियां चलीं। एक के बाद एक छह लाशें बिछ गईं। हालांकि 10 दिन पहले दोनों पक्षों में समझौता भी हुआ था। भरोसा करके गांव छोड़ चुका परिवार 10 साल बाद गांव लौटा। उस पर धोखे से हमला कर दिया गया। 
पहले राजीनामा किया फिर धोखे से मार दिया
पुलिस ने बताया कि गांव के 2 परिवारों के बीच पिछले 10 साल से रंजिश चल रही है। इसके चलते ही शुक्रवार को एक परिवार ने दूसरे परिवार पर फायरिंग कर दी। 3 पुरुष और 3 महिलाएं मारी गई हैं, सभी एक ही परिवार के हैं। 3 लोग घायल हैं।
इसी गांव के रविंद्र सिंह कांग्रेस विधायक हैं। पहले आपस में समझौता कर लिया और राजीनामा कर गांव में रहने के लिए न्यौता दिया और जैसे ही परिवार गांव में रहने आया वैसे ही दस साल से अपने परिजनों की हत्या का बदला लेने के लिए ताक में बैठे लोगों ने ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं और चंद मिनटों में 6 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। 
मुरैना के सिहोनिया थाने का एक वीडियो सामने आया है
 इसमें मृतक गजेंद्र तोमर के रिश्तेदार पुलिसकर्मियों से लेपा गांव में चलने के लिए कह रहे हैं। वे कह रहे हैं कि पुलिस बल लेकर चलिए, गांव में गोली चल गई है। कुछ लोग हमारे रिश्तेदारों को मार रहे हैं। हम एक घंटे से थाने में खड़े होकर पुलिस के लिए गुहार लगा रहे हैं। इस पर सिविल ड्रेस में खड़ा पुलिसकर्मी कहता है कि सुबह के समय कोई थाने में रहता नहीं है। थाने में 50 आदमी का स्टाफ नहीं है। यहां सिर्फ 10 आदमी की पोस्टिंग है। पुलिसवालों को बुला रहे हैं। इस पर गजेंद्र तोमर के रिश्तेदार बोले- लेपा गांव में गोलीबारी के बाद हम ग्वालियर से यहां आ गए। इस पर पुलिसकर्मी कहता है कि हमारे पास कोई कॉल नहीं आया आप लोगों ने बताया है। इसके बाद पुलिसकर्मी मोबाइल से कॉल करके किसी से कहता है आ जाओ जल्दी।