ग्वालियर में सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर हड़ताल पर,इलाज के लिए भटकते रहे मरीज

May 03 2023

ग्वालियर। अपनी मांगों को लेकर मध्य प्रदेश के 13 मेडिकल कॉलेज के करीब 15 हजार डॉक्टर 3 मई बुधवार से हड़ताल पर हैं। ग्वालियर में जयारोग्य अस्पताल समूह, स्वास्थ्य विभाग के करीब 500 से ज्यादा डॉक्टरों ने 3 मई बुधवार को काम नहीं किया। इमरजेंसी, ट्रॉमा, और आईसीयू (इंटेसिव केयर यूनिट) में आयुष डॉक्टर व्यवस्था संभाल रहे हैं, लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल के चलते ग्वालियर मे स्वास्थ्य सेवाएं लडख़ड़ा गई हैं।
जयारोग्य अस्ताल समूह में न तो मरीजों को इलाज मिला है ना ही जांच हुई है। ओपीडी में भी लोग नहीं पहुंच पाए हैं। बुधवार को होने वाले 26 ऑपरेशन आगे के लिए टाल दिए गए हैं। मरीजों को जबरन डिस्चार्ज किया जा रहा है। कुछ मरीजों को उनके अटेंडेंड बिना छुट्टी कराए ले गए हैं।
ऑपरेशन न होने से हताश लौट रहे मरीज
ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल समूह में बुधवार को 26 ऑपरेशन होने थे, लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल के चलते सभी ऑपरेशन टाल दिए गए हैं, जबकि मंगलवार को भी 19 ऑपरेशन टालेगए थे। दो दिन में 45 ऑपरेशन टाले गए हैं। ओपीडी में भी दोपहर तक संख्या 500 से 600 रह गई थी, जबकि सामान्य दिनों में जेएएच की ओपीडी 1900 से 2000 के करीब जाती है।
डॉक्टरों की हड़ताल का असर ग्वालियर-चंबल अंचल सहित प्रदेश के अन्य शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा। इसके लिए संभागीय आयुक्त ने ग्वालियर में 1 मई से छुट्टी पर गए सभी डॉक्टरों के अवकाश कैसिंल कर दिए हैं और तत्काल काम पर लौटने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही जीआरएमसी (गजराराजा मेडिकल कॉलेज) के डीन डॉ. अक्षय निगम को इमरजेंसी में गंभीर मरीजों के इलाज के इंतजाम करने के लिए कहा है।
जेएएच में हड़ताल की स्थिति में हालात न बिगड़े और इमरजेंसी सेवाएं चलती रहीं उसके लिए संभागीय आयुक्त दीपक सिंह ने डीन मेडिकल कॉलेज को सख्त निर्देश दिए हैं। जिसके बाद डीन ने आयुष विभाग से संपर्क कर आयुष डॉक्टरों को बुधवार से जब तक हड़ताल चलेगी जयारोग्य अस्पताल के इमरजेंसी, ट्रॉमा सेंटर, आईसीयू में मरीजों के इलाज के लिए ड्यूटी पर लगाया जाएगा। अभी तक जयारोग्य अस्पताल समूह को 30 आयुष डॉक्टर मिले है।
 भिंड गोहद निवासी हरदीप सिंह और उनके परिजन अपना सामान समेटकर घर जा रहे थे। उनका कहना था कि उनकी बड़ी आंत का ऑपरेशन होना था। सात दिन से जेएएच में भर्ती थे। दो बार ऑपरेशन की डेट मिली, लेकिन दोनों ही दिन डॉक्टरों के रवैये के चलते डाल दिए गए। आंत का ऑपरेशन न होने से हालत खराब है और अब लगता नहीं है कि जेएएच में डॉक्टर हड़ताल फिलहाल बंद करेंगे, इसलिए वह खुद ही डिस्चार्ज लेकर जा रहे हैं। अभी तो घर जा रहे हैं फिर कहीं और इलाज कराएंगे।
अस्पताल में शिवपुरी से इलाज के लिए आई महिला ममता के साथ भी ऐसा ही हुआ है। उसे पेट में पानी भरने की परेशानी है। तिल्ली का इलाज होना है। उसे आयुष डॉक्टर ने स्ट्रेचर पर जेएएच के मेडिसिन विभाग में भर्ती के लिए भेजा, लेकिन डॉक्टरों ने उसे भर्ती नहीं किया बल्कि भगा दिया। महिला अपनी बेटी के साथ अस्पताल परिसर में इसी आस से पड़ी थी कि शायदी डॉक्टरों की हड़ताल टूटे और उसे इलाज मिले।
बुधवार से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर गए डॉक्टरों की तरफ से डॉक्टर महासंघ के संयोजक डॉ.सुनील अग्रवाल का कहना है कि सरकार उनकी मांगों को पूरा करना चाहती है, लेकिन अधिकारी इसमें बाधक बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है लेकिन उनकी नियुक्तियां नहीं की जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं को जानबूझकर खराब करने के प्रयास किए जा रहे हैं। महासंघ सिर्फ अपने वेतन-भत्तों की मांग को लेकर यह हड़ताल नहीं कर रहा है, बल्कि डॉक्टर चाहते हैं कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रयास किए जाए।
इन व्यवस्थाओं को अफसरशाही से मुक्त किया जाए। यही कारण है कि आज 3 मई से ग्वालियर सहित पूरे मध्य प्रदेश के डॉक्टर हड़ताल पर है। इस बार हम आश्वासन पर मानने वाले नहीं है। पिछली बार भी आश्वासन देकर शासन ने वादाखिलाफी की थी। पर इस बार लड़ाई आरपार की है। 
डॉक्टरों के अवकाश कैंसिल
एक मई से डॉक्टर ग्रीष्म कालीन अवकाश पर चले जाते हैं। पर बुधवार 3 मई से पूरे प्रदेश में डॉक्टरों की हड़ताल को देखते हुए संभागीय आयुक्त दीपक सिंह ने इमरजेंसी में सभी डॉक्टरों के ग्रीष्मकालीन अवकाश निरस्त कर दिए हैं। इनमें से 90 प्रतिशत डॉक्टर वही हैं जो हड़ताल में शामिल है। पर अवकाश निरस्त होने से अब उनको लौटना पड़ेगा और अपना पक्ष बताना पड़ेगा कि वह काम करेंगे या हड़ताल में शामिल रहेंगे। जिससे आगे वह यह नहीं कह पाएंगे कि वह तो अवकाश पर थे।
आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में 10 हजार से ज्यादा सरकारी डॉक्टर आंदोलन कर रहे हैं। 3 मई बुधवार से डॉक्टर काम बंद हड़ताल पर आ गए हैंं। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सागर सहित तमाम मेडिकल कॉलेज वाले शहरों में हालात बिगडऩे की पूरी संभावना है। सरकार द्वारा इस हड़ताल से निपटने के लिए कोई ठोस कदम उठाने की बात सामने नहीं आई है। डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने प्रदेश में जागरूकता रैली निकालकर डॉक्टरों को आंदोलन करने के लिए समर्थन मांगा था। अब जब सरकार उनकी मांगे नहीं मान रही है, तो आंदोलन होकर रहेगा।