जज की पत्नी की मौत के मामला में कोर्ट ने बिरला हॉस्पिटल के मुख्य ट्रस्टी व सीईओ पर एफआईआर के आदेश दिए

Apr 28 2023

ग्वालियर। कोरोना वायरस संक्रमित लोगों के इलाज के नाम पर प्राइवेट अस्पतालों में खुलेआम लूटपाट की गई। अस्पतालों ने खूब कमाई की लेकिन अब समाज के सक्षम लोग उन्हें सबक सिखाने के लिए कदम उठा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला ग्वालियर में समाने आया है, जहां सीजेएम कोर्ट ने ग्वालियर-चंबल अंचल के निजी क्षेत्र के बिरला हॉस्पिटल के मुख्य ट्रस्टी गोविंद देवड़ा ओर सीईओ वेदप्रकाश पांडे के खिलाफ अमानत में खयानत का मामला दर्ज करने के आदेश दिए है। यह आदेश जज की पत्नी के जेवर हड़पने के मामले में दिए गए है।
गौरतलब है कि कोविड के दौरान रिटायर्ड जज की पत्नी सरला तोमर को 19 अप्रैल 2021 ग्वालियर के गोले का मंदिर क्षेत्र में स्थित निजी बिरला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद 29 अप्रैल को कोविड से उनकी मौत हो गयी थी। इस मामले में खास बात यह थी कि जब उन्हें हॉस्पिटल लाया गया था तब वे सोने हीरे के जेवरात पहने हुए थी। लेकिन उनकी डेथ के बाद उन्हें अस्पताल प्रबंधन ने जेवरात वापस नही किए। जिसको लेकर उपभोक्ता फोरम के जज ने गोला का मंदिर थाना पुलिस से शिकायत की थी। लेकिन पुलिस ने इस केस में खात्मा रिपोर्ट लगा दी थी। जिसके बाद फरियादी ने कोर्ट की शरण ली और न्याय की गुहार लगाई थी, सारी दलील और सबूत को देखते हुए कोर्ट के आदेश पर अब बिरला हॉस्पिटल प्रबंधन के विरुद्ध अमानत में खयानत का मामला हॉस्पिटल के मुख्य ट्रस्टी गोविंद देवड़ा व सीईओ वेद प्रकाश पांडे के विरुद्ध चलेगा।
याचिकाकर्ता के एडवोकेट मनोज उपाध्याय ने बताया कि गोला का मंदिर क्षेत्र में बिरला हॉस्पिटल है जोकि ग्वालियर का एक बड़ा हॉस्पिटल है, कोविड के समय मृतका श्रीमती सरला तोमर जो कि जज की पत्नी थी अस्पताल में भर्ती हुई थी जब अस्पताल में भर्ती हुई थी तब उनका स्वास्थ्य चेकअप के दौरान ठीक था। उस समय में वह कीमती जेवरात पहनी हुई थी जिस पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कर लिया गया था। उस दौरान वे बेहोश हुई और उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था। उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी। लेकिन मौत के बाद जो अस्पताल के कर्मचारी थे उनके जेवर चुरा लिए गए या रख लिए गए थे जो वापस नहीं दिए गए थे। और कर्मचारियों ने उनका बैग दे दिया था और कहा था कि इसमें उनका सारा सामान रखा हुआ है लेकिन जब घर आकर देखा तो मृतक सरला तोमर के जेवर बैग में नहीं थे जिसके बाद उनके पति ने गोले का मंदिर थाना में एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने अस्पताल को बचाते हुए न्यायालय में खात्मा खत्म करते हुए रिपोर्ट पेश की थी। इस मामले में मृतका के पति और बेटा फरियादी थे और आपत्ति जताई थी न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अस्पताल प्रबंधक के खिलाफ धारा 406 और 120 बी का अपराध पाते हुए पुलिस को अभियुग पत्र पेश करने के आदेश दिए थे। जेवरात की कीमत करीब 2 लाख 50 हजार पर कीमत थी और भर्ती के समय तक एक सोने की अंगूठी पहने हुई थी।
बता दें कि शिवपुरी के उपभोक्ता फोरम द्वारा इसी मामले में अस्पताल प्रबंधन पर 12 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति राशि पीडि़त परिवार को देने का आदेश भी पूर्व में दिया जा चुका है। वही क्रिमिनल केस की सुनवाई में सीजेएम कोर्ट ने यह आदेश दिया है।