आपको सुख पुण्य कर्म के उदय से मिला रहा है-गणिनी आर्यिकाश्री

Apr 16 2023

ग्वालियर। पाप कर्म का फल दु:ख और पुण्य कर्म का फल सुख है। आपको सुख कहा से मिल रहा है, सुख पुण्य कर्म के उदय से मिला रहा है। कर्म उदय में मिला हुआ सुख है। आपके जीवन मे पुण्य का उदय आया तो थोड़ी देर में पाप कर्म दु:ख आ जाता है। आपको सुख चाहिए मगर दु:ख नही चाहिए। दु:ख और सुख ये जीवन का जोड़ा है। सच्चा सुख तो अंदर की आत्मा है। यह विचार गणिनी आर्यिकाश्री स्वस्तिभूषण माताजी ने रविवार को दाना ओली स्थित दिगंबर जैन वरैया मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।
गणिनी आर्यिकाश्री ने कहा कि भगवान किसको कहोगें जिसने संसार के सारे सुख छोड़ दिए।भगवान आप लोगा मुनिराज, संत साधु व भगवान के पास जाकर उन्हें नमस्कार करते हो, उनके पास तो कुछ है ही नही देने के लिए मगर आप उस सुख के लिए जाते हो जो सुख आपके पास नही है वो सुख उनके पास में है और वो सुख इक्कठा करने से नही प्यार करने से मिलता है। 
भगवान श्रीराम को भी कर्मों ने नहीं छोड़ा था
 गणिनी आर्यिकाश्री स्वस्तिभूषण माताजी  ने कहा कि भगवान श्रीराम को भी कर्मों ने नहीं छोड़ा था, उन्हें जहां राजगद्दी मिलनी थी, वहां वनवास दिलवा दिया। राजा दशरथ ने सोचा था कि मेरा बेटा सुबह राजगद्दी पर बैठेगा, लेकिन, अयोध्या में सूर्य निकलने के पूर्व ही राम को अयोध्या छोडऩी पड़ी। इसी प्रकार कर्म ने महापुरुषों को भी नहीं छोड़ा। विधि का विधान कोई नहीं टाल सकता। भगवान राम को पग-पग परीक्षा देनी पड़ी। सीता जी का हरण हो गया, भैया लक्ष्मण को शक्ति लग गई। इन सभी को भगवान राम विधि का विधान समझते रहे। लोग भगवान को कर्ता मान लेते हैं, पर कर्म कहता है कि भगवन सुख और दु:ख देने वाले नहीं है। व्यक्ति जैसे कर्म करता है वैसे ही फल पाता है।