पहली बार अंबेडकर जयंती पर रिहा हुए 22 बंदी

Apr 14 2023

ग्वालियर। क्रोध पर काबू किया होता तो जीवन के वह कीमती साल जो आपके परिवार की जरूरत के थे बच सकते थे और जेल में आपका जीवन बर्बाद नहीं होता। यह बात शुक्रवार को केन्द्रीय जेल में जेल अधीक्षक विदित सरवैया ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जयंती पर बंदियों को रिहाई देते समय उनका शॉल श्रीफल से सम्मान करते हुए कही।
यह पहला मौका है जब अंबेडकर जयंती पर बंदियों की रिहाई हुई, इससे पहले 26 जनवरी और 15 अगस्त पर ही बंदियों की रिहाई की जाती थी। इस अवसर पर जेल प्रबंधन के साथ ही रिहा होने वाले बंदी और उन्हें विदाई देने आए अन्य बंदी मौजूद थे। 
जेल अधीक्षक ने कहा कि क्रोध के चलते ही आप अपने परिवार, दोस्तों तथा अन्य स्नेहीजनों से दूर रहे, इसलिए यह प्रण करें कि क्रोध को अपने ऊपर हावी नहीं होने देंगे। जिससे आपका जीवन सुखमय बीते। साथ ही आपने अपने जीवन के कीमती वर्ष जेल में बिताए हंै, इसलिए यह परेशानी आपसे ज्यादा कौन जान सकता है, इसलिए अब बाहर जाकर लोगों को क्रोध से बचने के लिए आप जागरूक करंे। जिससे वह इस तरह का कदम ना उठाएं। 
जब जेल प्रबंधन ने रिहा होने वाले बंदियों का शॉल व श्रीफल से सम्मान किया तो सम्मान पाने वाले बंदियों के साथ ही वहां पर मौजूद अन्य बंदी भी भावुक हो गए और उनकी आंखें नम हो गर्इं।
जैसे ही जेल की चार दीवारी से बंदी रिहा होकर बाहर आए, तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू निकल गए, क्योंकि जिनसे मिलने के लिए वह वर्षों जेल में तड़पे थे वह उनके सामने थे। 
शुक्रवार को रिहा हुए बंदियों में मुंगाराम पुत्र रन्धीर, राजेश पुत्र जगराम, अमर सिंह पुत्र फूलचन्द्र, रामसेवक पुत्र भनेलाल, रामगोपाल पुत्र भनेलाल, रमजी उर्फ रामजी पुत्र भोगीराम उर्फ भागीरथ, रघुवीर पुत्र लज्जाराम, नाथू पुत्र अजमेरी, गुल्टू पुत्र रतनू, मुन्ना पुत्र जगनू, लाखन पुत्र अजमेर, सुधीर पुत्र महावीर, मुन्ना पुत्र देवीराम, फूलबदन पुत्र सगुन, झब्बू उर्फ मूरत पुत्र मोहन सिंह, धर्मेन्द्र पुत्र बाबूलाल, नन्दकिशोर पुत्र शंकरी, अरविन्द पुत्र जगत सिंह, भारत पुत्र घनश्याम, कल्लू पुत्र वान सिंह, बल्लू उर्फ बलराम पुत्र अमरचन्द, विश्वनाथ पुत्र दर्शन सिंह शामिल है। 
सामाजिक संस्था ने की मदद
दो बंदियों सुधीर पुत्र महावीर और अमर पुत्र फूलचंद की रिहाई के लिए साढ़े तेरह हजार रुपए की जरूरत थी। जब इसका पता एक सामाजिक संस्था को चला तो सामाजिक संस्था ने बंदियों की रिहाई के लिए साढ़े तेरह हजार रुपए जमा कराए, जिससे उन बंदियों की रिहाई भी बाकि बंदियों के साथ हुई।