संत समागम 11 अप्रैल को, 51 संत आयेंगे

Apr 09 2023

ग्वालियर।11 अप्रैल को पंचवटी कॉलोनी एबी रोड बहोड़ापुर में महा संत समागम होने जा रहा है। पहली बार इतने बड़े स्तर पर कोई संत समागत करने जा रहा है। इसमें देश के ख्याति प्राप्त मठ, आश्रम से आधा सैकड़ा से अधिक संत ग्वालियर की धरा पर पधारेंगे और संत समागम की शोभा बढाएंगे। इसके साथ ही इन संतों की अमृतवाणी से ग्वालियर के निवासी और भक्तों को इनका आशीर्वाद मिलेगा।

यह पूरा आयोजन गिरिराज जन कल्याण सेवा समिति द्वारा कराया जा रहा है। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए समिति के संयोजक रिंकू गौरी परमार व महामंडलेश्वर संतोष गुरू ने बताया कि यह संत समागम अपने तरह का अनूठा कार्यक्रम होगा। यह पूरी तरह राजनीति से दूर रहेगा। इसका उद्देश्य मन को शांति देना और शहर के लोगों का भला करने का है। क्योंकि कोई भी एक साथ इतने सारे ख्याति प्राप्त संत के दर्शन नहीं कर सकता।

संत समागम के इस ब्रहद समागम में देशभर से ख्याति प्राप्त लगभग 51 संत महात्मा उपस्थित रहने वाले है जो कि अपनी अमृतमयी वाणी से ग्वालियर वासियों व भक्तजनो को आशीष देंगे। साथ ही गोवर्धन धाम की परिक्रमा मार्ग पर राधाश्याम अनुरागी महावीर सिंह भगत जो कि अपने सुरीले कंठ से बिहारी जी के भजन गाते है वह भी इस समागम में अपने विदेशी अनुयायियों के साथ उपस्थित रहकर संत समागम में अपने बिहारी जी को समर्पित प्रेम रस में डुबे भजनों के माध्यम से समागम में अनुपम छटा बिखेरेंगे।
संत समागम में मुख्य वक्ता के रूप मे खनेता धाम के संत रामभूशण दास महाराज साथ ही दंदारौआ धाम के रामदास महाराज, अनिरूध्दवन महाराज, महामंडलेश्वर धूमेश्वर धाम, गंगादास की बड़ी शाला के महत रामसेवक दास महाराज जडेरूआ धाम के महाराज हरिदास, पटियावाले बाबा के महाराज दीनबंधु, गोशाला लाल टिपारा ऋशभ देवानंद महाराज, त्यागी महाराज शनिचरा, ऋशिमहाराज अंबाह आदि प्रमुख संतो की उपस्थिती में धर्म और आध्यात्म संस्कृति और संस्कार समागम ग्वालियर हो रहा है।
संयोजक रिंकू परमार, महामंडलेश्वर संतोश गुरू, भाजपा नेता जयसिंह कुशवाह, राजकुमार परमार, जगत सिंह कौरव ने बताया कि 30 मार्च को रामनवमी पर इस भव्य आयोजन के लिए धर्म ध्वजा की स्थापना की गई थी। संत समागम 11 अप्रैल को बहोड़ापुर स्थित पंचवटी कॉलोनी में होगा। गोरी रिकू परमार ने बताया संत समागम से 1 दिन पूर्व आयोजन स्थल के पास मंदिर पर अखंड रामायण का पाठ प्रारम्भ होगा। अखंड रामायण के पाठ के समापन हवन के बाद संत समागम प्रारंभ होगा सत समागम के पश्चात महा प्रसादी का वितरण किया जाएगा।