संसार मे सुखी या दु:खी है वो कर्म के कारण है-आर्यिकाश्री स्वस्तिभूषण

Mar 29 2023

ग्वालियर। इस संसार को कर्म चला रहे है। सबकी अपनी कर्म व्यवस्था है। अपना अपना खाता है। कोई किसी के कर्म कुछ नही करता है। यह ऑटोमेटिक व्यवस्था है। कर्म का बंध  होना, कर्म का उदय आना, सत्ता में रहना ये सब स्वयं ही होता है जीवन तो केवल भाव बनाता है। जैसे भाव होते है वैसे उस तरह का कर्म बंध होगा। यह विचार गणिनी आर्यिकाश्री स्वस्तिभूषण माताजी ने बुधवार को नई सडक़ स्थित चंपाबाग धर्मशाला में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही। मंच पर गणिनी आर्यिकाश्री लक्ष्मीभूषण माताजी विराजमान थी।
गणिनी आर्यिकाश्री ने कहा कि व्यक्ति को धर्म करने के लिए पुण्य चाहिए। धर्म हर व्यक्ति नही कर सकता। साधुसंतों के मंगल प्रवचन हर व्यक्ति नही सुना सकता क्योंकि जबतक पुण्य नही होगा। पुण्य के कार्य पुण्य के साथ ही होते है। धर्म करने के लिये बहुत पुण्य चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया को चलने वाला कर्म है। यदि कोई संसार मे सुखी या दु:खी है वो कर्म के कारण है। कोई छोटा या बड़ा है तो वो कर्म के कारण है। कोई सेठा है कोई चोर है ये सब कर्म के कारण है। बिना कर्म के कुछ भी होने वाला नही है। आदमी सुख से ज्यादा बोर होता है दु:ख से नही। जब आदमी से पूछो तो कहता जरूर है कि दु:खी हूं मगर सुखी होने का खुद महसूस करता है। यदि सुखी होना चाहते हो तो उसके लिए केवल एक ही चीज है वो है धर्म। दुनिया में भी सुखी रहना है तो धर्म को अपनाना पड़ेगा।। धर्म मे दो चीजें होती हैं ज्ञान और भक्ति ये दो धारा है। भक्ति आप लोगो को परमात्मा से जोड़ती है और ज्ञान से खुद को जुड़ते हो, इसलिए ज्ञान और भक्ति दोनों जीवन में जरूरी है। प्रतिदिन गणिनी आर्यिकाश्री ससंघ के मंगल प्रवचन 8:30 बजे से नई सडक़ स्थित चंपाबाग धर्मशाला में होंगे।
पुण्य का घड़ा फूटते ही पाप का उदय होने लगता है-आर्यिकाश्री लक्ष्मीभूषण
गणिनी आर्यिकाश्री लक्ष्मीभूषण माताजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य अपने जीवन में हर क्षण कर्म करता रहता है, कर्म अच्छे या बुरे दो प्रकार के होते हैं। भले कर्म पुण्य कहलाते हैं तथा बुरे कर्म पाप कहलाते हैं। जब इंसान अच्छे कर्म करता है तो पुण्य कर्मों का बंध होता है, लेकिन जब बुरे कर्म करता है तो पाप का बंध होता है। पुण्य खत्म होने के बाद पाप का उदय होता है। पिछले समय के पुण्य के कार्यों की वजह से अगर कोई पाप करता है तो उसका छीप जाता है। लेकिन पुण्य का घड़ा फूटते ही पाप का उदय होने लगता है। इसलिए जीवन में बदलाव के लिए सही मार्गों का अनुसरण करने की जरूरत है।
1 अप्रेल होने वाले मुनिसुव्रतनाथ महामंडल विधान की पत्रिका हुआ विमोचन
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि गणिनी आर्यिकाश्री स्वस्तिभूषण माताजी एवं गणिनी आर्यिकाश्री लक्ष्मीभूषण माताजी के सानिध्य एवं महावीर जंयती महोत्सव समिति एवं अखिल जैन समाज वृहत्तर ग्वालियर के तत्वाधान में 1 अप्रैल शनिवार को होने वाले मुनिसुव्रतनाथ महामंडल विधान की पत्रिका विमोचन महावीर जयंती समिति ने किया।