वकीलों की हड़ताल का असर कोर्ट में नियमित बैठ रहे जज, पक्षकार कर रहे अपनी पैरवी
Mar 27 2023
ग्वालियर। 25 चिह्नित मामलों को तीन महीने में निराकृत किए जाने के चीफ जस्टिस के आदेश के बाद हाईकोर्ट में 23 मार्च से वकील हड़ताल पर है और कोर्ट का बहिष्कार कर रहे हैं। हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के लाख हिदायत के बाद भी वकील काम पर लौटने को तैयार नहीं है। एक ओर जहां एडवोकेट कार्य से खुद को दूर रखे हुए हैं तो वहीं न्यायाधीश नियमित दिनों की तरह कोर्ट में बैठ रहे हैं और सुनवाई कर रहे हैं। वकील के बिना पहुंच रहे पक्षकार से ही उनकी बात को सुन रहे हैं और फैसला कर रहे हैं। हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ और जिला एवं सत्र न्यायालय में भी यह नजारा देखा जा सकता है, लेकिन यह 5 से 10 प्रतिशत केस में ही हो पा रहा है। 95 फीसदी मामलों में पक्षकार वकील के भरोसे ही हैं और परेशान हो रहे हैं। अब स्टेट बार काउंसिल की बैठक होगी।
इसमें तय किया जाएगा कि तीन महीने में प्रकरण निराकृत करने के आदेश का आगे किस तरह से विरोध किया जाए। चीफ जस्टिस ने प्रदेशभर की 200 बार एसोसिएशन को अवमानना के नोटिस जारी किए हैं। कार्य से विरत रहने के फैसले को अवैधानिक करार दिया है। कोर्ट में आने वाले पक्षकार और उनकी सुनवाई इस तरह हो रही है।
मारपीट के मामले में एक अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था। सोमवार को सेशन कोर्ट में सुनवाई थी। अग्रिम जमानत की मांग करने वाले राजकुमार सिंह के पिता दयानंद सिंह पहुंचे। वकील हड़ताल पर थे तो वह कोर्ट उपस्थित हुए। यहां जज ने उनसे पूछा कि वह अपना पक्ष रखें। इस पर उनका कहना था कि उनके बेटे को झूठा फंसाया गया है। अभी तक उसका कोई अपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। उसका पड़ोसी से सामान्य मुंहबाद ही हुआ था। कोर्ट उसे जमानत का लाभ दे, इस पर कोर्ट ने आवेदन करने वाले को जमानत का लाभ देने का आदेश दिया है।
भिंड से आए अबरार दिव्यांग हैं। मारपीट के एक मामले में वह भिंड से तारीख करने सोमवार को आए थे। एडीजे संजय गोयल की कोर्ट में उनकी सुनवाई होनी थी। पर दोपहर 1 बजे तक उनको तीन घंटे वकील का इंतजार करते हो गए थे। अबरार का कहना है कि वकील नहीं मिल रहा है इसलिए कोर्ट में अपने आने की उपस्थिति के लिए हस्ताक्षर कर दिए हैं। अगली तारीख की डेट मिल गई है।
किलोमीटर दूर बेहट के रामनाथ सिंह की सोमवार को तारीख थी। हत्या के प्रयास के मामले में वह आरोपी हैं। एडीजे संजय गोयल की कोर्ट में उन्हें पेश होना था, लेकिन वकील हड़ताल पर होने के कारण सुनवाई नहीं हो पा रही है। वह कोर्ट तो पहुंचे, लेकिन काफी परेशान हुए हैं। उनका कहना है कि यहां कोई जवाब नहीं दे रहा है। वकील साहब नहीं मिले हैं तो सुनवाई नहीं हो पा रही है।
हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच, जिला एवं सत्र न्यायालय में सुनवाई पर आने वाले पक्षकार परेशान हो रहे हैं और वकील अपने चैंबर में एकजुट होकर आगे के एक्शन पर रणनीति बना रहे हैं। अब स्टेट बार एसोसिएशन की एक बैठक होगी उसमें तय किया जाएगा कि आगे इस आंदोलन को किस तरह बढ़ाना है। एडवोकेट कब तक अपनी मांगों पर अड़े रहेंगे।
ग्वालियर में एडवोकेट की हड़ताल से हाईकोर्ट, सेशन कोर्ट में हर दिन चार हजार से ज्यादा केस प्रभावित हो रहे हैं। वकीलों का कहना है कि वह पक्षकारों के हितों के लिए ऐसा कर रहे हैं। तीन महीने में 25 प्रकरण निपटाने के आदेश से आम लोगों को न्याय नहीं मिलेगा।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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