महात्मा गांधी के पास लॉ की कोई डिग्री नहीं थी-मनोज सिन्हा

Mar 24 2023

ग्वालियर। की आईटीएम यूनिवर्सिटी में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि जिस राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को हम बैरिस्टर गांधी के नाम से भी जानते हैं, उनकी लॉ की डिग्री पर उपराज्यपाल ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा बहुत लोगों को वो भी पढ़े-लिखे लोगों को यह भ्रांति है कि गांधी जी के पास लॉ की डिग्री थी, लेकिन यहां मैं बता रहा हूं कि उनके पास कोई डिग्री नहीं थी। गांधी जी सिर्फ हाई स्कूल डिप्लोमा लिए थे। यह विवादित स्टेटमेंट अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
ग्वालियर की आईटीएम यूनिवर्सिटी में डॉ. राम मनोहर लोहिया की स्मृति में चांसलर रमाशंकर सिंह द्वारा संपादित डॉ. राम मनोहर लोहिया-रचनाकारों की नजर में खण्ड-2 पुस्तक का लोकार्पण हुआ। कार्यक्रम में मनोज सिन्हा बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे। यहां उन्होंने पुस्तक का विमोचन करने के साथ ही जब बोलना शुरू किया तो लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
उपराज्यपाल सिन्हा सबसे पहले देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर बोले- गांधीजी सिर्फ हाई स्कूल डिप्लोमा किए थे। अब यहां बैठे लोग मुझसे सवाल करेंगे तो मैं यह बात पूरे तथ्यों के साथ कह रहा हूं, इसका आधार है मेरे पास। उनके इस स्टेटमेंट पर पूरे देश में गांधी जी की डिग्री पर नई बहस शुरू हो गई है।
उपराज्यपाल ने कहा कि आज डॉ. लोहिया होते तो खुश होते कि नल-जल योजना, घर-घर शौचालय और स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को बराबरी का अधिकार देने की कोशिश की गई है। मुझे लगता है कि विकास का शिखर छूने के लिए एक-एक व्यक्ति की जड़ों को पोषित करना होगा। तभी समाज की बुनियाद मजबूत हो सकती है। ये बात उन्होंने आईटीएम यूनिवर्सिटी द्वारा अमर शहीद स्मरण दिवस के अवसर पर आयोजित आठवें राम मनोहर लोहिया स्मृति व्याख्यान में कही।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कवि एवं कला समीक्षक प्रयाग शुक्ल ने कहा कि आप लोगों की उम्र में मैं लोहिया से मिला था। पहली भेंट में विचारों का अपना उजाला होता है। लोहिया को हम राजनेता नहीं मानते। लोहिया जननेता थे। लोहिया के पास विचारों का एक खजाना था।
भारतीय समाज को नई परिभाषा दी- रमाशंकर सिंह
आईटीएम यूनिवर्सिटी के फाउंडर चांसलर रमाशंकर सिंह ने कहा- भारत में आजादी, गरीबी, बीमारी, शिक्षा के ये जो मुख्य मुद्दे हैं, उस पर राजनीति कैसे चले, इसके लिए लोहिया की तरह सचेतक बने। जिनका सरकार में आना-जाना महत्वपूर्ण न हो वो सत्ता में न जाते हुए इन महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाएं। लोहिया अकेले ऐसे व्यक्ति थे जिसने सारे निर्गुण सिद्धांतों को सगुण कार्यक्रमों में बदल दिया और उन्होंने भारतीय समाज को नई परिभाषा दी समता, स्वतंत्रता और सौंदर्य की।
कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि पूर्व सांसद केसी त्यागी ने कहा कि भगत सिंह ने लिखा है कि जब तक व्यक्ति का व्यक्ति के द्वारा, समाज का समाज के द्वारा शोषण बंद नहीं हो जाता है तब तक मेरी और मेरे जैसे लोगों की लड़ाई जारी रहेगी। भगत सिंह का सपना अधूरा है। इसलिए आप पढ़ो और बढ़ो। कार्यक्रम में आईटीएम यूनिवर्सिटी की चांसलर रुचि सिंह चौहान, प्रो चांसलर डॉ. दौलत सिंह चौहान, वाइस चांसलर प्रो. एसएस भाकर विशेष रूप से मौजूद रहे।
डॉ. राममनोहर लोहिया की स्मृति में रमाशंकर सिंह द्वारा संपादित डॉ. राम मनोहर लोहिया-रचनाकारों की नजर में खण्ड-2 पुस्तक का लोकार्पण किया गया। बता दें, पुस्तक की प्रस्तावना प्रो. राजकुमार जैन द्वारा दी गई है। इस मौके पर प्रो. जैन ने कहा कि कि रमाशंकर सिंह को मैंने तृप्त होते कभी देखा ही नहीं, कोई न कोई कमी रह ही जाती हैं। उन्होंने कहा कि मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कोई लोहिया को अगर जनना चाहता है तो अकेली इस किताब पढक़र वो लोहिया के व्यक्तित्व के बारे मे जान पाएगा।