आगरा से बिना मजदूरी दिए भगाए अदिवासियों को एसडीओपी संतोष पटेल ने ठेकेदार से दिलाए मेहनत के रुपए

Mar 22 2023

ग्वालियर। हमेशा से अपनी पुलिसिंग के लिए जाने पहचाने वाले एसडीओपी घाटीगांव संतोष पटेल ने फिर अच्छा काम किया है। आगरा से बिना मजदूरी दिए भगाए ग्वालियर के आदिवासी मजदूरों को उनका हक दिलाकर उनका दिल जीत लिया है। वो भी आदिवासी मजदूरों के बिना शिकायत किए। यह आदिवासी मजदूर आगरा से लौट कर घाटीगांव में उनके दफ्तर के पास एक पेड़ किनारे उदास बैठे थे।
डीएसपी पटेल की नजर पड़ी तो वह खुद ही उनके पास पहुंच गए। सिविल ड्रेस में अफसर को पहचान नहीं पाए पर पूरी आपबीती सुना दी। मन ही मन अफसर ने गरीब मजदूरों को उनका हक दिलाने की ठान ली। फिर क्या उनके अपने दफ्तर बुलाया और आगरा के ठेकेदार किसान को सही शब्दों में समझाया। 30 मिनट में आगरा से ऑनलाइन मजदूरों का पेमेंट कर दिया गया। एसडीओपी ने बिना शिकायत और अपने जिले की सीमा से बाहर के मामले को सुलझा दिया।
घाटीगांव सर्कल के भंवरपुरा स्थित डांडा खिरक निवासी लालजी मोगिया, अपने साथी लल्लू राम, रूपसिंह, सहित करीब 16 से 17 लोगों और बच्चों के साथ एक महीने पहले उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में एक ठेकेदार संतोष शर्मा के यहां आलू की फसल काटने गए थे। ठेकेदार किसान ने प्रति मजदूर 400 रुपए प्रति रोज देने का वादा किया था। करीब एक महीने तक यह मोगिया आदिवासी परिवार सहित आगरा में खेतों में काम कर आलू की फसल निकालते रहे। अब काम खत्म होने के बाद उनका मेहनताना बना था। जिसमें कुछ ठेकेदार दे चुका था, लेकिन 60 हजार रुपए बकाया था। 
ठेकेदार ने 60 हजार रुपए में से 30 हजार रुपए वहां मजदूरों के रहने और खाने के खर्च के रूप में काट लिए। जब मजदूरों ने इसका विरोध किया तो उन्हें बिना भुगतान किए आगरा से भगा दिया। ट्रेन के जरिए सभी मोगिया आदिवासी परिवार के सदस्य ग्वालियर पहुंचे और यहां से घाटीगांव पहुंचे। यहां एक पेड़ के नीचे उदास बैठे थे। वह सोच रहे थे कि अब क्या करें कि इसी समय वहां से सिविल ड्रेस में गुजर रहे एसडीओपी घाटीगांव संतोष पटेल की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने उनके पास जाकर बातचीत की तो गरीब मजदूर उनको पहचान नहीं पाए, लेकिन अपनी समस्या बता दी।
एसडीओपी संतोष पटेल ने ठेकेदार संतोष शर्मा को कॉल कर बातचीत की। उसे फोन पर समझाया कि मजदूरों का हक मारना अच्छा नहीं है। पहले तो ठेकेदार भी कुछ अकड़ में बोल रहा था। पर एसडीओपी पटेल ने अपने अंदाज में समझाया तो ठेकेदार को अपनी गलती का अहसास हो गया। तत्काल उसने 60 हजार रुपए ऑनलाइन पेमेंट कर पहुंचा दिए। जिसे एसडीओपी पटेल ने सभी मजदूरों को उनका मेहनताना दिया। जिसको पाकर वह बहुत खुश नजर आए।
एसडीओपी संतोष पटेल जब मजदूरों के मेहनताना निकलवाने के लिए प्रयास कर रहे थे तो दूसरी ओर मजदूरों ने भी  एसडीओपी पटेल के लिए कुछ करने की सोची। जब तक एसडीओपी पटेल लौटकर आए सभी मजदूरों ने उनके ऑफिस और बंगले के आसपास पूरी सफाई कर उसे चकमा दिया। जिसे देखकर वह काफी खुश नजर आए। एसडीओपी ने साफ सफाई के लिए मजदूरों को मेहनताना भी देना चाहा, लेकिन उन्होंने नहीं लिया।