रंगपंचमी पर फूल व गुलाल द्वारा भक्तों से होली खेलने निकले अचलनाथ
Mar 12 2023
ग्वालियर। उदया तिथि के अनुसार रंगपंचमी का त्योहार रविवार को शहर भर में धूमधाम से मनाया गया। इसके साथ ही होलाष्टक से शुरु हुआ होली पर्व का समापन हो गया। रविवार को रंगपंचमी पर शहर के मंदिरों में रंग-अबीर सुबह से ही उड़ रहा था। रविवार को रंगपंचमी पर सुबह से ही भक्तों के बीच उत्साह नजर आ रहा है।
शहरवासियों के आस्था का केंद्र प्रमुख मंदिर अचलेश्वर से हर साल की तरह परंपरागत रूप से भगवान अचलनाथ भक्तों से होली खेलने के लिए ढोल-ताशों के साथ निकले। अचलनाथ के विग्रह स्वरूप को फूलों से सजे डोले में विराजमान कर, उसे कंधों पर उठाकर भक्तगण चल समारोह के रूप में दोपहर 12 बजे अचलेश्वर मंदिर से रवाना हुए। तलघर में कोर्ट की सील होने से इस साल भगवान अचलनाथ का स्वर्ण विग्रह नहीं निकाला जा सका।
बाबा अचलनाथ पालकी में सवार होकर बैंड-बाजे एवं ढोल- ताशों के साथ जैसे ही शहर भ्रमण कर भक्तों से होली खेलने निकले तो बम-बम भोले के जयकारों से रास्ते गूंजने लगे। भगवान अचलनाथ ढोलताशों के साथ होली खेलने के लिए जैसे ही निकले तो भक्तों फूल उड़ाना शुरू कर दिया। भक्त रास्ते भर एक-दूसरे पर गुलाल और फूल बरसा रहे हैं।
इसके बाद सनातन धर्म मंदिर रोड, इंदरगंज चौराहा, दाल बाजार, नया बाजार, लोहिया बाजार, ऊंट पुल, पाटनकर बाजार, दौलतगंज, महाराज बाड़ा, सराफा बाजार, गस्त का ताजिया होते हुए फालका बाजार स्थित राम मंदिर में अचलनाथ पहुंचे, यहां फूल और गुलाल से होली खेली गई ।
इसके बाद ऊंट पुल होते हुए गिर्राजजी मंदिर पर भगवान अचलनाथ का चल समारोह पहुंचा, यहां पर गिर्राजजी के साथ होली की परंपरा का निर्वहन किया गया।
जब भगवान अचलनाथ दाल बाजार पहुंचे तो व्यापारियों ने फूलों की वर्षा की तो कई भक्तों ने गुलाल उड़ाते हुए पूजा अर्चना कर मनोकामनाएं मांगी। यहां की गई गुलाल की बरसात से सडक़ एवं आसमान रंगबिरगा हो गया। यहां घरों की छतों से रहवासियों ने गुलाल व पुष्प वर्षा करके अचलनाथ की आगवानी की।
चक्रधर के आंगन में अचलनाथ ने खेली होली
गिर्राजजी के बाद भगवान अचलनाथ की सवारी श्री सनातन धर्म मन्दिर में गाजे - बाजे के साथ भगवान चक्रधर के साथ होली खेलने पहुंचे। यहां मन्दिर प्रांगण में अचलनाथ की अगवानी भगवान चक्रधर की ओर से अध्यक्ष कैलाश मित्तल, प्रधानमंत्री महेश नीखरा एवं समस्त पदाधिकारी, कार्यकारिणी सदस्य मुख्य पुजारी रमाकान्त शास्त्री के आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पुष्प वर्षा करके की गई। इस अवसर पर भगवान चक्रधर का मनमोहक विशेष श्वेत श्रृंगार किया गया। बाबा अचलनाथ के साथ पधारे सभी भक्तों की अगवानी केशरयुक्त ठंडाई के साथ की गई।
यहां लगभग 3000 गिलास ठंडाई की व्यवस्था की गई। भगवान चक्रधर से होली खेलने के बाद अचलनाथ अचलेश्वर मंदिर परिसर में पहुंच गए यहां मंदिर में जमकर गुलाल उड़ाया गया जिससे मंदिर का फर्श रंगबिरंगा हो गया। आरती एवं श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण के साथ चल समारोह का समापन हो गया।
चल समारोह में खुले ट्रॉले पर राधा-कृष्ण के स्वरूप में कलाकार विराजमान थे, जो होली के पारंपरिक रसिया एवं फाग पर नृत्य कर रहे थे, साथ ही लोगों पर गुलाल एवं पुष्प उड़ा रहे थे।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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