वर्दी में बेटियों ने किया मार्च पास्ट तो माता-पिता का सीना हुआ गर्व से चौड़ा

Mar 12 2023

एक किसान की बेटी.. गांव में पढ़ी, पिता के साथ मिलकर जीतोड़ मेहनत से पीछे नहीं हटी। अपनी मेहनत के बलबूते पर जब वह बेटी देश के सर्वोच्च अध्र्यसैनिक बल बीएसएफ में असिस्टेंट कमांडेंट बनकर पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर पासिंग आउट परेड में मार्च पास्ट करती दिखी, तब माता-पिता और छोटे भाइयों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। यह कहानी है उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की रहने वाली रुचि चौहान की। जिसने ग्वालियर के टेकनपुर स्थित बीएसएफ अकादमी में 52 सप्ताह का कठिन प्रशिक्षण प्राप्त किया और अब देशसेवा के लिए आतुर है। 
बीएसएफ अकादमी टेकनपुर में 48 असिस्टेंट कमांडेंट की पासिंग आउट परेड का आयोजन परेड ग्राउंड में किया गया। 48 असिस्टेंट कमांडेंट में दो बेटियां थी, जो कड़ी मेहनत कर इस मुकाम पर पहुंचीं। यह दोनों कहानियां सुकून देती हैं, यह दोनों कहानियां बताती हैं..अब देश की बेटियां देशसेवा की राह पर बढ़ रही हैं। 
बुलंदशहर की रहने वाली रुचि चौहान पासिंग आउट परेड के बाद जैसे ही अपने पिता विनोद कुमार के सामने पहुंची और वर्दी में सैल्यूट किया तो पिता के मुंह से निकल पड़ा कि मेरी बेटा मेरा अभिमान है। रुचि अपने घर की पहली बेटी है, जो फोर्स में पहुंची। उनके पूरे परिवार में कोई युवक तक कभी वर्दी नहीं पहन सका। 
देशसेवा के लिए समर्पित उत्तराखंड पिथौरागढ़ की रहने वाली नेहा भंडारी कहती हैं कि उनकी तीसरी पीढ़ी है, जो देशसेवा के लिए समर्पित है। वह बचपन से ही फौज या अर्द्धसैनिक बल में जाना चाहती थीं। दिल्ली यूनिवर्सिटी से गणित आनर्स में ग्रेजुएशन के बाद तैयारी करना शुरू कर दी। बीएसएफ में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर जब चयन हुआ तो उनका सपना पूरा हो गया।