विभीषण ने प्रतिकूलता में राम का साथ दिया और सफलता दिलाई-गणाचार्यश्री

Mar 10 2023

ग्वालियर। हर इन्सान को जीवन की कमियां बताने वाला दोस्त खोजना चाहिए ताकि वह वास्तविक जीवन जी सके। झूठी प्रशंसा एवं चापलूसी करने वाले दोस्त तो बहुत हैं लेकिन सच्चा मित्र वही है जो आपकी कमियां बताए और उनसे मुक्त कराए तथा विपदा में कभी साथ न छोड़े। विभीषण ने प्रतिकूलता में राम का साथ दिया और सफलता दिलाई। सफलता की मिठाई खाने वाले बहुत हैं लेकिन विपदा एवं प्रतिकूलता में साथ देने वाले नहीं के बराबर हैं। दोस्ती का अर्थ खाना-पीना एवं मौज-मस्ती करना नहीं बल्कि मुसीबत आने पर भामाशाह, हनुमान की तरह अपने मित्र को संकट से उबारना और आत्मीयता जताना है। दुख-पीड़ा से उबारना ही सच्ची दोस्ती का प्रमाण है। यह विचार गणाचार्य पुष्पदंत सागर महाराज ने शुक्रवार को मुरार से पद विहार कर महाराज पुरा पहुँचकर आशीष वचन देते हुए व्यक्त किए।
गणाचार्यश्री ने कहा कि सबसे बड़ा उपकारी वही है जो मुसीबत में काम आए। मन बड़ा चालाक है दूसरों को दोषी ठहराता है और स्वयं को ईमानदार बन जाता है। वास्तविक दूध वही है जो शक्कर डालते ही मधुर हो जाए। पानी वही वास्तविक है जो नींबू डालने पर शक्कर डालते ही शिंकजी व शर्बत बन जाए। पाषाण वही अच्छा है जो शिल्पी के हाथ लगाते ही प्रतिमा बन जाए। पर्वत वही अच्छा है जो संत के ठहरते ही ऊर्जा से भरकर तीर्थ बन जाए। शून्य वही है जो एक अंक सामने आते ही नौ अंक की वृद्धि हो जाए। वास्तविक जीवन वही है जो परोपकार का अवसर मिलते ही सागर में ब्रिज व पुल बन जाए। जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज ससघ का पद विहार मुरार से भिंड के लिए राजेश लाला मित्र मंडल के राजेश जैन, विपुल जैन, कमल जैन, नरेश रांवक, आदि लोगो ने कराय।
गणिनी आर्यिकाश्री ने गणाचार्य श्री को साष्टांग दण्डवत प्रणाम किया
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुरार में  गणाचार्यश्री पुष्पदंत सागर महाराज ससंघ से गणिनी आर्यिकाश्री आर्षमती माताजी ने साष्टांग दण्डवत प्रणाम किया तो गुरुदेव गणाचार्यश्री पुष्पदंत सागर महाराज ने अपना मंगल आशीर्वाद प्रदान किया तो मौजूद श्रद्धालुओं के जयकारों से गूंज उठा।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के पुत्र देवेंद्र प्रताप सिंह (रामू भैया) ने मुरार स्थित संतर में जैन संत निवास में पहुंचकर विराजित गणाचार्यश्री पुष्पदंत सागर महाराज एवं आचार्यश्री सौरभ सागर जी महाराज के दर्शन कर चरणों में श्रीफल समर्पित कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज ने उन्हें पुष्पगिरी तीर्थ पर दर्शनों के लिए आने की बात कही।
अहम को छोडक़र प्रभु के चरणों में समर्पित रहना चाहिए-आचार्यश्री सौरभ सागर
आचार्यश्री सौरभ सागर महाराज ने आशीष वचन देते हुए कहा कि सभी को अहम को छोडक़र प्रभु के चरणों में समर्पित रहना चाहिए। मंदिर विरासत में मिला है, संस्कार, समर्पण एवं सद्भावना रूपी पौधा गमले में लगाते हैं तो उसमें पानी देंगे तो वह हरा भरा रहेगा नहीं तो वह सूख जाएगा। धरती पर लगाते हैं तो पौधा स्वता ही जमीन का पानी लेकर अंतिम छोर के पत्ते तक को हरा-भरा रखता है।बच्चों में संस्कारों, पुरुषों में सदभावना तथा महिलाओं में धर्म व गुरु के प्रति समर्पण होना चाहिए। यह सब जहां होता है वह धर्म की शून्यता नहीं रहती है। धर्म फलता-फूलता है।