होली की गरिमा ना हो जाए भंग / रंगों का उत्सव होली
Feb 25 2023
भारत में यूं तो कई उत्सव मनाए जाते हैं परंतु होली के उत्सव की बात ही कुछ और हैं। होली रंगो का उत्सव कहलाती है इसमें नाच गाना मौज मस्ती के साथ खास पकवान मनाने का विचार हैं या यूं कह लीजिए कि पारंपरिक पूजन के साथ होली विधि-विधान के साथ मौज मस्ती वाला त्यौहार हैं।
होली का त्यौहार फागुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है पूर्णिमा के दिन होली को जलाने का विधान है एवं दूसरे दिन होली को खेलने का । पूरे भारतवर्ष में होली जोर शोर से मनाई जाती है एक दूसरे को गुलाल से तिलक लगाकर एवं बधाइयां देकर भारत में विभिन्न राज्यों में अपने अपने पारंपरिक रीति रिवाज के साथ मनाया जाता है।
यूं तो होली के ऊपर कई दंत कथाएं है, एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा के अनुसार भक्त प्रहलाद के पिता राक्षस हिरण्यकश्यप स्वयं को भगवान मानते थे, वे भगवान विष्णु के भक्तों पर अत्याचार किया करते थे परंतु प्रहलाद विष्णु भक्त थे। हिरण्यकश्यप उन्हें इसी कारण कई बार मारने का प्रयास कर चुके थे, जब उनके प्रयास सफल नहीं रहे तब हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद की विष्णु भक्ति से परेशान होकर अपनी बहन होलिका से मदद मांगी क्योंकि होलिका को आग में ना जलने का वरदान था इसीलिए हिरण कश्यप चाहते थे कि वह भक्त प्रहलाद को अपनी गोदी में लेकर जलती हुई चिता पर बैठ जाएं ताकि पहलाद समाप्त हो जाए परंतु भगवान विष्णु की कृपा और आशीर्वाद से होलिका जब भक्त प्रहलाद को जब जलती हुई अग्नि में गोदी में लेकर बैठी तब वह स्वयं ही जल गई और भक्त प्रहलाद उस अग्नि से बच गए। इस प्रकार यह कहानी बुराई पर अच्छाई की जीत को भी दर्शाती है तब से लेकर आज तक होली खेलने के एक दिन पहले ही पूर्णिमा के दिन होली जलाकर होलिका दहन मनाया जाता है।
यदि भारतीय संस्कृति की बात की जाए तो होली का महत्व तव और भी बढ़ जाता है जब हम द्वेष एवं बुराइयों के साथ ईर्ष्या जलन से मुक्त होकर अपने दुश्मन को भी गले लगा कर होली की बधाई देते हैं और गिले-शिकवे सब समाप्त कर बैर भाव को मिटा वाला संदेश होली उत्सव के रूप में देते हैं।
होली भारत में ही नहीं यह पर्व देश विदेशों में भी सुर्खियां मैं रहता हैं , ब्रज की होली तो विश्व भर में प्रसिद्ध है ब्रज में होली खेलने के लिए भारत के कोने कोने से ही नहीं बल्की देश विदेशों से पर्यटक आते हैं । ब्रज की होली का कृष्ण मंदिरों में भव्य रूप से देखने को मिलता हैं आज भी श्री कृष्ण के गांव के लोग श्री राधा जी के गांव बरसाने होली खेलने के लिए जाते हैं । प्राय गुलाल और फूलों से सराबोर होली महोत्सव देखने को मिलता है। हर जगह राधा कृष्ण जी की जय जय कार से गूंज उठती है।
परंतु धीरे-धीरे यह उत्सव कुछ क्षेत्रों में अलग ही स्वरूप लेता जा रहा है अच्छे रंगों की गुणवत्ता समाप्त होती जा रही है। अच्छे रंगों का स्थान आर्टिफिशियल रंगों ने ले लिया हैं एवं होली के उत्साह का उत्सव अब नशे की ओर बढ़ रहा है, नशे का चलन बढ़ने के कारण होली के रंग में भंग मिल ही जाती है। होली के उत्साह में लोग कभी-कभी मर्यादा भी तोड़ देते हैं इस प्रकार होली की गरिमा को ठेस पहुंचती है बेहतर है हम लोग होली की गरिमा को बनाए रखने के लिए अपनी संस्कृति के रंग एवं विचारों के साथ ही होली बनाएं।
आशी प्रतिभा ( स्वतंत्र लेखिका)
ग्वालियर
संपादक
Rajesh Jaiswal
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