धर्म का मार्ग और पुण्य की साधना नहीं छोडऩी चाहिए-मुनिश्री
Feb 22 2023
ग्वालियर। धर्म के मार्ग और पुण्य संचय का साधन कभी नहीं छोडऩा चाहिए। मनुष्य के जीवन की नैया पार इन्हीं दोनों मार्गों के माध्यम से होनी चाहिए। धर्म का मार्ग और पुण्य संचय का साधन दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। क्योंकि जो व्यक्ति धर्म के मार्ग पर चलेगा वहीं पुण्यकर्म करेगा। यह बात श्रमण मुनि श्री विनय सागर महाराज ने बुधवार को सिध्दक्षेत्र सोनागिर में धर्म सभा को संबोधित करते हुए कही। श्रमण मुनिश्री ध्याननंद सागर महाराज भी मौजूद रहे।
मुनिश्री ने कहा कि धर्म का मार्ग जीवन में शांति देता है। इंसान को धर्म के साथ शांति का जीवन मिल जाए तो इससे बड़ी कोई पूंजी नहीं हो सकती है। हम अपने जीवन में धर्म और पुण्य दोनों का समावेश आसानी से कर सकते हैं, लेकिन इंसान इनका समावेश नहीं कर रहा है। जिसके कारण मनुष्य भटक रहा है और भटकते भटकते वह मनुष्य का जीवन पूरा कर लेगा। इसके बाद उसे पता नहीं अगले जन्म में कौनसा भव (योनि) मिले। विचारों से ही संस्कारों की उत्पत्ति होती है। यही विचार हमारे जीवन को श्रेष्ठ बनाते हैं। इसलिए मनुष्य को अपनी लगन भगवान के प्रति लगानी चाहिए। जिससे वह इसी जन्म में भव को पार कर सके।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि बताया कि जैन सिद्धक्षेत्र सोनागिर में श्रमण मुनिश्री 108 विनय सागर महाराज एवं मुनिश्री ध्याननंद सागर महाराज के सानिध्य में सोनागिर स्थित दिगंबर जैन कांच का मंदिर में अष्टान्हिका महापर्व पर 1008 सिद्धचक्र महामण्डल विधान एवं विश्वशांति महायज्ञ का आयोजन 28 फरवरी से 7 मार्च तक किया जाएगा। जिसमें प्रतिष्ठाचार्य विजय शास्त्री के मार्ग दर्शन में होगा। जिसका शुभारंभ 28 फरवरी को गाजेबाजे के साथ कलश यात्रा निकलकर किया जाएगा। आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी गई है।
श्री दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र सोनागिर संरक्षित कमेटी (न्यास) के तत्वावधान में श्री दिगंबर सिद्धक्षेत्र सोनागिर पर लगाने वाला मेला 7 से 11 मार्च तक पांच दिवसीय फागुनोत्सव वार्षिक मेले का आयोजन किया जाएगा। मेले में कई सांस्कृतिक व रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। जिसकी तैयारी सोनागिर संरक्षिक कमेटी न्यास के द्वारा शुरू कर दी गई है।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन आदर्श कलम ने बताया कि जैन तीर्थ सोनागिर सिद्धक्षेत्र में लगने वाले मेले में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचने वाले श्रद्धालु सुबह पहाड़ पर मुख्य 57 मंदिर में विराजित भगवान चंद्रप्रभु का अभिषेक करते है। सोनागिर पर्वत पर 77 जिनालयों के मन्दिरों के देवदर्शन, वंदना पूजा करने के साथ शाम को दीपदान करते हैं। इसके अलावा सायंकाल परिक्रमा एवं राात्रि में पर्वतराज विराजमान भगवान चंद्राप्रभु की संगीतमय भक्ति के साथ भव्य आरती करते है। पिछले 400 साल से यहां लगातार मेले का आयोजन किया जा रहा है।
संपादक
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