खुशियों की दास्तां-एक कार्ड जिसने यश की जिंदगी बचा ली

Feb 21 2023

ग्वालियर। यश पवार ने बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना देखना शुरू कर दिया था। बालपन में स्टेथोस्कॉप रूपी खिलौने को गले में डालकर यश अपने माता-पिता से तोतली जुबान में कहा करते कि हमसे इलाज कराया करो। अपनी आँखों के तारे की बाल सुलभ हरकत देखकर माता-पिता फूले नहीं समाते। यश की स्कूली शिक्षा भी पूरी नहीं हुई थी तभी यह पता चला कि वह किडनी की गंभीर बीमारी से पीडि़त है। आर्थिक तंगी की वजह से यश के माता-पिता अपने आप को असहाय महसूस कर रहे थे। ऐसे में एक कार्ड यश के लिये संजीवनी बन गया। 
शहर के लक्ष्मीगंज क्षेत्र में स्थित बाईसाब की परेड निवासी यश के पिता राकेश पवार बताते हैं कि डॉक्टर द्वारा की गई जाँच में पता चला कि यदि कोई अपनी किडनी दान कर दें तो यश का जीवन बच सकता है। यश की माँ श्रीमती सिंकू पवार अपने जिगर के टुकडे को स्वयं की किडनी देने के लिये सहर्ष तैयार हो गईं। अब बात आई किडनी ट्रांसप्लांट पर होने वाले भारी भरकम खर्च की। राकेश पवार कहते हैं कि परिवार के आर्थिक हालात ऐसे नहीं थे कि यह खर्च वहन कर सकें। मुझे निराश देखकर अस्पताल के डॉक्टर बोले यदि आपके पास आयुष्मान कार्ड हो तो आसानी से इलाज हो जायेगा। 
राकेश पवार का कहना है कि यह बात सुनकर उम्मीद की किरण जगी और हम दौड़े-दौड़े अपने घर पहुँचे। मुझे ध्यान था कि एक बार घर पर दस्तक देकर सरकारी मुलाजिमों ने कोई फॉर्म भरवाया था, शायद वह आयुष्मान कार्ड का ही था। घर पहुँचे तो धर्मपत्नी ने इस बात की पुष्टि कर दी कि हाँ अपने बेटे का आयुष्मान कार्ड बना है। फिर क्या हमारे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। शहर के सिम्स हॉस्पिटल में मेरे बेटे की किडनी ट्रांसप्लांट हो गई। मेरी धर्मपत्नी ने यश को अपनी किडनी दी है। राकेश बताते हैं किडनी ट्रांसप्लांट पर लगभग 4 लाख 40 हजार रूपए का खर्चा आया और यह पूरा खर्चा आयुष्मान कार्ड से मिल गया। 
अपने दुलारे बेटे यश को नया जीवन मिलने से सिंकू-राकेश पवार दम्पत्ति के चेहरे पर आई खुशी देखते ही बनती है। यश इस साल 12वी कक्षा में अध्ययनरत हैं और उसका कहना है कि अब हम खूब मन लगाकर पढ़ाई करेंगे और डॉक्टर बनकर दिखायेंगे। वहीं उनके माता-पिता का कहना है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आयुष्मान भारत योजना चलाकर और मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आयुष्मान कार्ड बनवाकर हमारे बेटे को नई जिंदगी दी है। विकास यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जब साडा क्षेत्र में विकास कार्यों की सौगात देने ग्वालियर आए तो राकेश अपने बेटे यश के साथ मुख्यमंत्री के प्रति धन्यवाद व्यक्त करने पहुँचे थे।