तीर्थ हमारे देश की संस्कृति के माथे के तिलक होते हैं-गणिनी आर्यिकाश्री

Feb 19 2023

ग्वालियर। तीर्थ हमारे देश की संस्कृति के माथे के तिलक होते हैं। इसमें प्राचीन तीर्थ तो देश की वह धरोहर है जिनकी कीमत तो केवल श्रद्धालुओं द्वारा तीर्थ वंदना की जाने वाले अनन्तानंत श्रद्धाभक्ति के भावों से पहचाना जा सकता है। अंतरंग भावों से की गई भक्ति अध्यात्मक और ध्यान के रंगों से सराबोर कर देती है। यह विचार गणिनी आर्यिकाश्री आर्ष मति माताजी ने रविवार को कुलैथ में स्थित दिगंबर जैन मंदिर में प्राचीन चर्तुबिम्ब त्रिमूर्तियों प्रतिमाओं के महा मस्तिकाभिषेक व भक्तामर महामंडल विधान में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।
गणिनी आर्यिकाश्री ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी के हम सभी अनुयायी हैं। उनके द्वारा बताये गये जियो और जीने दो एवं विश्व में शांति अहिंसा से ही होगी इसे हम नारों तक सीमित नहीं रखें। आवश्यकता है हम भी अहिंसा के रंग में रंगकर अपने दैनिक जीवन के साथ-साथ आचरण में भी अहिंसा का अलख जगायें। अगर हमारे परिणामों में, आचरण में, अहिंसा के साथ सरलता, निर्मलता विद्वमान हो जायेगी तो हमारी तीर्थ वंदना और प्रभु की भक्ति करना सार्थक है। 
चर्तुबिम्ब त्रिमूर्तियों प्रतिमाओं का किया महामस्तिकाभिषेक, गूँजें जयकारे
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि  गणिनी आर्यिकाश्री आर्षमति माताजी ससंघ के सानिध्य एवं विधानचार्य पंडित सगुनचंद जैन के मार्गदर्शन में प्राचीन चर्तुबिम्ब प्रतिमाओं का अभिषेक इन्द्रों नें पीले वस्त्र धारण कर कलशों से महामस्तकभिषेक किया। जैसे ही महामस्तकभिषेक हुआ तो पूरे मंदिर मे जैन समाज के लोगो जयकारों के साथ सभागार गॅूज उठा। 
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि गणिनी आर्यिकाश्री आर्ष मति माताजी एवं विधानचार्य पंडित सगुनचंद्र जैन के मार्ग दर्शन में भक्तामर विधान का शुभारंभ सुनील लोहिया ने ध्वजारोहण कर किया। वही भक्तामर मंडप पर मंगल कलश की स्थापना महिलाओ ने की। संगीतमय भक्तिमय 48 महाकाव्यों दोहे के ऋद्धि सिद्धी मंत्रो उच्चारणो के साथ 48 श्रीफल के साथ भगवान आदिनाथ की संगीतमय भक्ति के साथ आकर्षण मंडप पर समर्पित कर भक्तामर विधान महाआर्चना रचाई गई।