दूसरे दिन गुरुवार को भी डॉक्टरों ने 10 बजे से 12 बजे तक कार्य बंद रखा

Feb 16 2023

ग्वालियर। डॉक्टर हड़ताल पर हैं। यह डॉक्टर चिकित्सा अधिकारी संघ के नेतृत्व में हड़ताल पर हैं। डॉक्टर अपनी बुनियादी समस्याओं के कारण हड़ताल पर हैं। जिला अस्पताल में गुरुवार को जब हड़ताल पर गए तो केवल प्रात 10 से दोपहर 12 बजे तक हड़ताल पर रहे।
बता दें, कि यह डॉक्टर सरकार से नाराज हैं। उनका कहना है कि उनके प्रमोशन के लिए कोई पॉलिसी नहीं है। यहां चरणबद्ध प्रमोशन नहीं होते हैं, जो जुगाड़ लगा लेता है, उसका प्रमोशन हो जाता है और जो नहीं लगा पाता वह रह जाता है। जिसका परिणाम यह हुआ कि कई डॉक्टर जुगाड़ लगाकर सीएमएचओ जैसे अहम पद पर जमे हुए हैं। सीएमएचओ व सीएच परमानेंट बनने चाहिए लेकिन यहां ऐसा नहीं है। डॉक्टरों के काम में प्रशासनिक दखलंदाजी की जाती है, वह भी पूरी तरह से गलत हैं, इससे हम लोगों को काम में बहुत परेशानी आती है। डॉक्टरों के लिए पुरानी पेंशन लागू की जाना चाहिए, इसकी मांग समय-समय पर डॉक्टर उठाते आ रहे हैं लेकिन अभी तक इस पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया गया है।
बीते बुधवार से डॉक्टर्स की बड़ी हड़ताल शुरू हो गई है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मध्यप्रदेश चिकित्सक महासंघ के बैनर तले हड़ताल का ऐलान किया है। हड़ताल को सरकारी जूनियर डॉक्टर्स और डॉक्टर से जुड़े 7 संगठनों का समर्थन मिला है। सभी जिलों में हड़ताल के पहले दिन सुबह 8 बजे से काली पट्टी बांधकर डॉक्टरों ने कार्य किया। गुरुवार दूसरे दिन प्रदेश के लगभग 10 हज़ार डॉक्टर्स आंदोलनरत हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की मुश्किलें बढ़ सकती है।
गुरुवार 16 फरवरी को सुबह 10 बजे से 12 बजे तक धरना प्रदर्शन कर डॉक्टरों ने कार्य बंद रखा। जिसमें रूटीन कार्य दिन में ओपीडी, आईपीडी ऑपरेशन, एमएलसी और पोस्टमार्टम जैसे कार्य बंद, किए, सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं चालू रहेगी।
इसके साथ ही शुक्रवार 17 फरवरी को सुबह 8 बजे से संपूर्ण कार्य बंद किया जाएगा। जिसके चलते ओपीडी वार्ड राउंड सहित इमरजेंसी एमएलसी पोस्टमार्टम सेवाएं भी बंद कर दी जाएंगी। प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुनील अग्रवाल का कहना है कि मध्य प्रदेश का चिकित्सा स्तर देश की सूची में लगातार निचले पायदान पर आ रहा है। 
लगातार चिकित्सकों को शासकीय अस्पतालों मेडिकल कॉलेजों से नौकरी छोडऩा पड़ रहा है। हर स्तर पर विषय विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी होती जा रही है। पिछले 20 सालों से कार्यस्थल में उचित चिकित्सा आधारभूत संसाधनों की कमी है। यही वजह है कि इन सभी व्यवस्थाओं को मजबूत करने के साथ ही डीएसीपी और पुरानी पेंशन लागू करने की मांग उठाई गई है। यदि सरकार ने उनकी मांगों को पूरा नहीं किया तो, आंदोलन और बड़ा रूप लेता जाएगा। 
मध्य प्रदेश भर के 13 मेडिकल कॉलेज को जोड़ते हुए 38 जिलों में चिकित्सक बचाओ चिकित्सा बचाओ यात्रा भी निकाली जा चुकी है, लेकिन सरकार ने उनकी मांगों पर गौर नहीं किया। अब मजबूरन उन्हें यह कदम उठाना पड़ रहा है।