प्रबंध में सीखने की क्षमता जीवन भर रहती है-डॉ. उपाध्याय

Jan 28 2023

ग्वालियर। प्रबंध में सीखने की क्षमता जीवन भर रहती है क्योंकि प्रबंध ही ऐसा है जो सभी विषयों को एकसाथ जोडक़र रखता है जिससे हमारा व्यक्तित्व विकास स्वत: ही हो जाता है- यह बात मध्यभारत शिक्षा समिति द्वारा आयोजित कार्यशाला के द्वितीय सत्र में मुख्यवक्ता के रूप में उपस्थित प्रो. योगेश उपाध्याय ने कही। आगे मुख्यवक्ता ने व्यक्तित्व विकास में प्रबंधन के महत्व को समझाते हुये कहा कि एक अच्छा व्यक्तित्व सीखने की क्षमता, नेतृत्व करने की क्षमता, आत्मीय एवं भावनात्मक संतुलन स्थापित करने की क्षमता और अच्छे विचारों को ग्रहण करने की क्षमता से परिपूर्ण होना चाहिये और प्रबंधन इन सभी गुणों को प्रसारित करने वाला तथा इनका प्रशिक्षण देने वाला विषय है प्रो. योगेश ने अपनी बात को विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों के समक्ष रखा और सबके साथ और सबके सुख की समरस भावना को रखने वाली भारतीय संस्कृति की वैश्विक स्तर पर स्थापित छवि को स्मरण करते हुये एक अच्छा मनुष्य बनने की विद्यार्थियों को शुभकामनायें दी। मध्यभारत शिक्षा समिति द्वारा संचालित छह शिक्षण संस्थाओं के चुनिंदा छात्र/छात्राओं हेतु आयोजित एक कार्यशाला के प्रथम सत्र में विद्यार्थियों को व्यक्तित्व विकास क्यों और कैसे विषय पर मार्गदर्शन देते हुये मध्यभारत शिक्षा समिति के अध्यक्ष प्रो. राजेन्द्र बांदिल जी ने कहा कि एक उदात्त व्यक्तित्व के लिये उदार मन, सकारात्मक विचारों की प्रसारक बुद्धि, स्वस्थ शरीर एवं परोपकार करने की भावना से परिपूरित आत्मा का समन्वित विकास आवश्यक है। 
आगे उन्होंने विद्यार्थियों को अपने व्यक्तित्व विकास के लिए क्या? कैसे? क्यों? कहाँ? कब? कौन? जैसी जिज्ञासाओं के महत्व को भी समझाया। उन्होंने बताया कि जिज्ञासा एवं एकाग्रता के साथ-साथ सजगता, वाणी संयम और आध्यात्मिक चिंतन को व्यक्तित्व विकास के अनिवार्य अंगों के रूप में अपनाकर व्यक्तित्व का विकास किया जा सकता है। चांदिल जी ने अपने उद्बोधन में प्रभु श्रीराम महारानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद जैसे महानायकों के प्रेरणाप्रद उदाहरणों के माध्यम से चारित्रिक उत्कर्ष के संबंध में भी दिशाबोध दिया।
कार्यशाला के प्रथम दिन के अंत में प्रतिभागियों के लिये प्रबंधकीय खेलों का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम में समूह गीत बोध वाक्य एवं ध्यान योग जैसे व्यक्तित्व विकास के छोटे-छोटे कार्यक्रम भी आयोजित किये गये। इस अवसर पर मध्यभारत शिक्षा समिति द्वारा संचालित सात संस्थाओं के प्राचार्य, प्रतिनिधि शिक्षक एवं शासी निकाय के पदाधिकारी उपस्थित रहे।