जिसके हृदय में धर्म का वास होता है उसे देवता भी नमन करते हैं- गणिनी आर्यिकाश्री

Jan 28 2023

ग्वालियर। धर्म उत्कृष्ट मंगल है धर्म के अधीन अहिंसा, संयम और तप है। जिसके हृदय में धर्म का वास होता है उसे देवता भी नमन करते हैं। धार्मिक क्रियाएं बहुत हो रही हैं फिर भी मन में शांति नहीं है क्योंकि मन से की हुई क्रिया से ही शांति मिलती है। मनुष्य जन्म मौज और शौक में खो देता है इस संसार में न जाने कितने आए और कितने चले गए परंतु याद सिर्फ महापुरुषों को रखा जाता है। यह विचार गणिनी आर्यिकाश्री आर्षमति माताजी ने ग्वालियर से मुरैना के लिए चल रहे मंगल विहार के दौरान शनिवार को बामौर स्थित दिगंबर जैन मंदिर में भक्तामर दीप अर्चना में कही।
गणिनी आर्यिकाश्री ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी त्याग तपस्या और उनके गुणों के कारण आज भी हमारे बीच मौजूद हैं। माया की चकाचौंध में हम प्रभु को भूल जाते हैं मनुष्य का मन बेलगाम है इसलिए मन पर संयम रखना बहुत जरूरी है। महापुरुषों में सबसे महत्वपूर्ण गुण मन पर नियंत्रण ही है। विहार के संघपति पदमचंद्र जैन ने बताया कि गणिनी आर्यिकाश्री आर्षमति माताजी ससंघ का 29 जनवरी रविवार को दोपहर 2 बजे से ग्वालियर हाइवे से गाजेबाजे के साथ मुरैना धौलपुर हाइवे पर स्थित श्री आदिनाथ ज्ञान तीर्थ में भव्य मंगल प्रवेश होगा। मंगल प्रवेश में ग्वालियर से बस व गडियो से कॉफी संख्या गुरुमां भक्तगण पहुँचकर सम्मिलित होंगे।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन आदर्श कलम ने बताया कि  ज्ञान तीर्थ पर होने वाले पंचकल्याणक महोत्सव में परम प्रभावक शिष्य सप्तम पट्टाचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, परम प्रभावक गुरुमां गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी आचार्य श्री विनीतसागर महाराज, गणिनी आर्यिका लक्ष्मीभूषण माताजी, सृष्टिभूषण माताजी, गणिनी आर्यिकाश्री आर्षमति माताजी सहित लगभग 50 साधु-साध्वियों  के मंगल सानिध्य श्री आदिनाथ मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं विश्व शांति महायज्ञ महोत्सव का आयोजन 1 फरवरी से 6 फरवरी तक होंगे। श्री पंचकल्याणक महोत्सव की समस्त धार्मिक क्रियाएं एवं अनुष्ठान प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी श्री जयकुमार "निशांत" टीकमगढ़ एवं ब्र. नितिन जैन भैयाजी खुरई के निर्देशन में सम्पन्न होंगी ।
 इस विशाल एवं भव्य आयोजन में मूलनायक भगवान आदिनाथ सहित लगभग 24 मूर्तियों एवं त्रिकाल चौबीसी के चरण चिन्हों की प्राण प्रतिष्ठा होगी। आयोजन में सम्पूर्ण भारतवर्ष से लाखों की संख्या में गुरुभक्तों के सम्मिलित होने की संभावना है।