दो कुलों की लाज रखती हैं बेटियां-शास्त्री

Jan 22 2023

ग्वालियर। पारस विहार कॉलोनी स्थित चमत्कारी हनुमान मंदिर में चल रही संगीतमयी रामकथा के चौथे दिन रविवार को व्यास पीठ पर विराजित पं. भगवत स्वरूप शास्त्री ने राम-जानकी विवाह का प्रसंग सुनाया। यह सुनकर पूरा पांडाल खुशी से झूठ उठा। शास्त्री जी ने कहा कि सीता स्वयंवर पर प्रत्यंचा चढ़ाना कोई सरल कार्य नहीं था। भगवान राम ने जनकपुर के स्वयंवर में अपनी अदभुत वीरता दिखाई और जिस धनुष को राजा महाराजा हिला नही सकें उस धनुष को उठाकर राम ने माता सीता से विवाह किया।
माता सीता ने रामजी के गले में वर माला डालकर उन्हें पति के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि जनकपुर से जब सीताजी की विदाई हुई तब उनके माता-पिता ने उन्हें ससुराल में कैसे रहना है इसकी सीख दी। प्रत्येक माता-पिता को अपनी बेटी के विवाह के समय ऐसी ही सीख देनी चाहिए। कन्या को ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिये जिससे ससुराल व मायका दोनों कुल कलंकित हो। माता सीता ने पूरे जीवन अपने माता पिता की सीख का पालन किया और जीवन में कष्ट सहन करते हुए भी कोई अनुचित कार्य नहीं किया। विवाह में पारीक्षित सुनीता-रमेश शर्मा के साथ कपिल भार्गव, राजकुमार पांडे, जयदीप सिकरवार, नीरज दंडोतिया, आदि श्रद्धालुओं ने राम बारात का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।