साल की पहली शनि एवं मौनी अमावस्या पर भक्तों ने शनि देव को किया तेल-तिल अर्पण

Jan 21 2023

ग्वालियर। पवित्र माघ माह के कृ ष्ण पक्ष की अमावस्या पर 29 साल बाद एक साथ पड़े शनि एवं मौनी अमावस्या के शुभ संयोग पर जहां अंचल के प्रसिद्ध एंती शनि मंदिर मेले का आयोजन किया गया जिसमें श्रद्धालुओं की विशाल भीड़ देखी गई, वहीं शहर के शनि मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। इसके साथ अन्य मंदिरों में भी लोगों ने पहुंचकर दर्शन किए एवं दान -पुण्य किया। वैदिक हिंदू धर्म में हर तिथि का एक विशेष महत्व होता है। जिसमें आज की अमावस्या तिथि का खास महत्व है। साल की सभी 12 अमावस्या मैं यह एकमात्र अमावस्या है। 
जिसमें स्नान, दान के अलावा मौन व्रत रखने का खसा महत्व है। इस दिन मौन रहकर जप, तप, साधना, पूजा पाठ किए जाते हैं। इस दिन शनिदेव अपनी मूल त्रिकोण राशि में होने के साथ अमावस्या के अधिपतिदेव होने के कारण पीपल की पूजा, नदियों में जल स्नान अन्न व वस्त्र दान करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस दिन मौन व्रत रखने का भी विशेष महत्व है।
शहर में जीवाजीगंज कटीघाटी स्थित शनिमंदिर, एबी रोड स्थित नवग्रह मंदिर, दाल बाजार शनि मंदिर पर इस अवसर पर विशेष आयोजन हुए जहां श्रद्धालुओं ने पहुंचकर शनिदेव का तेल से अभिषेक कर उन्हें काले तिल, काले वस्त्र, जनेऊ, फूलमाला अर्पित कर इमरती एवं उड़द के पकवानों का भोग लगाया। कटीघाटी शनि मंदिर के पुजारी धर्मेंद्र भारद्वाज ने बताया कि इस अवसर पर मंदिर प्रबंधन द्वारा प्रसाद वितरण किया गया। ’योतिषाचार्य डॉं. सतीश सोनी के अनुसार मौनी अमावस्या तिथि आज शनिवार सुबह 6.17 बजे से प्रारंभ होकर 22 जनवरी तडक़े 2.22 तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार मौनी शनिचरी अमावस्या है आज मनाई गई। इस मौके पर शनि, सूर्य और शुक्र की युति से खप्पर योग का निर्माण होगा जो 7 मार्च तक यानी माघ मास से फाल्गुन मास के मध्य खप्पर निष्पादित होगा। इसके साथ ही चंद्रमा शनि की राशि मकर में संचरण करेंगे। ऐसे में शनिचरी अमावस्या पर शनि की कृपा भक्तों पर खूब बरसेगी।