हेमू कालानी के प्राणों की आहुति को कभी भुलाया नहीं जा सकता

Jan 21 2023

ग्वालियर। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी शहीद हेमू कालानी को अंग्रेजों ने उनके 20 वें जन्म दिन से दो माह पहले 19 साल की उम्र में फांसी दी थी। देश के लिए उनके प्राणों की आहुति को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। शहरवासियों ने शनिवार को उनके बलिदान दिवस पर उन्हें याद किया और अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। भाजपा जिलाध्यक्ष अभय चौधरी, पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल, पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता, कमल माखीजानी, कनवर किशोर मंगलानी, उपेन्द्र बैस, सुघर सिंह पवैया, अनिल सांखला, सतीश बोहरे, संजय पोतनीस सहित पार्टी के कार्यकर्ताओं के अलावा हरीश ब़ृजवानी, अनिल शर्मा, डॉ. राजकुमार लाडकानी, दिलीप ठाकुर सहित अन्य संगठनों के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने महाराज बाड़ा स्थित हेमू कालानी चौक पर उनके प्रतिमा स्थल पर पहुंचकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि अंगे्रजी हुकूमत को उखाड़ फेंकने के लिए युवाओं की टीम का नेतृत्व करते हुए वे स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए थे। वे फिरंगी सरकार के खिलाफ छापामार गतिविधियों में भाग लेते थे। उन्होंने अंग्रेजों की ट्रेन को फिश प्लेटें उखाडक़र गिरा दिया था। इस मामले में उन्हें अंग्रेजी हुकूमत ने पहले तो उम्रकैद की सजा सुनाई थी बाद में उसे फांसी की सजा में तब्दील कर फांसी दे दी थी।