सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर भगवान आदिनाथ के संदेश को जीवन में उतारें-गणिनी आर्यिकाश्री

Jan 20 2023

ग्वालियर। भगवान आदिनाथ का संदेश है कि ऋषि बनो या कृषि करो। आज पूरा विश्व उन्हीं के बताये मार्ग पर चलकर अपना जीवनयापन कर रहा है। जैन धर्म के सिद्धांत प्रारंभ से ही अहिंसा के सिद्धांत रहे हैं। सभी को भगवान आदिनाथ ने सत्य अहिंसा का पालन करते हुए अपने जीवन को जीना है और पूरे विश्व को अहिंसा का संदेश देना है। यह बात गणिनी आर्यिकाश्री आर्ष मति माताजी ने शुक्रवार को विनय नगर स्थित श्री भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में भगवान आदिनाथ के मोक्ष कल्याणक दिवस पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
 गणिनी आर्यिकाश्री ने कहा कि भगवान आदिनाथ जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर हैं। सभी तीर्थंकरों के पांच कल्याणक होते हैं, जिनमें गर्भ कल्याणक, जन्म, तप, ज्ञान और अंतिम कल्याणक मोक्ष कल्याणक होता है। मोक्ष कल्याणक में तीर्थंकर शरीर, कर्म आदि से मुक्त होकर सिद्घ हो जाते हैं और उनका पुन: संसार में आवागमन नहीं होता है। मनुष्य जीवन के लिए संसार से मुक्ति सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि होती है। मोक्ष कल्याणक के माध्यम से भगवान आदिनाथ ने हजारों वर्ष पूर्व आज ही के दिन मोक्ष पद प्राप्त किया था। 
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि गणिनी आर्यिकाश्री आर्षमति माताजी ससंघ के सानिध्य में पंडित राजेन्द्र जैन ने मंत्रो से सौधर्म इंद्र सुभाषचंद्र जैन सहित इंद्रो ने पीले वस्त्र धारण कर भगवान आदिनाथ का कलशों से अभिषेक जयकारों के साथ किया। गणिनी आर्यिकाश्री ने अपने मुख्यबिंद मंत्रो का उच्चारण कर सगुनचंद्र जैन एवं दिलीप कुमार जैन परिवार ने भगवान आदिनाथ के मस्तक पर बृहद शांतिधारा की।
गणिनी आर्यिकाश्री आर्षमति माताजी के सानिध्य में इन्द्र-इन्द्राणियों ने भक्तामर विधान के साथ भगवान आदिनाथ की अष्टद्रव्यों से पूजन कर अर्घ्य समर्पित करें। वही पूजन के बाद निर्वाण काण्ड का वाचन करते हुए संगीतकार प्रेमप्रकाश जैन व शरद जैन के भजनों पर भक्ति नृत्य करते हुए 11 किलो का प्रथम निर्वाण लड्डू श्रीमती बीना जैन प्रेमप्रकाश जयप्रकाश रवि जैन परिवार, दूसरा लड्डू श्रीमान जगदीश प्रसाद जी मनोज जितेंद्र विजय मुकेश जैन परिवार एवं तीसरा सुभाषचंद्र जैन परिवार सहित जैन समाज के लोगों ने जयकारों के साथ लड्डू समर्पित किया।