.रामानंदाचार्य जी ने भवसागर पार करने के लिए बनाया शरणागत सेतु: मदनमोहन दास जी सिद्धपीठ गंगादास जी की बड़ी शाला में श्रद्धा से मनी जगद्गुरु स्वामी रामानंदाचार्य जी की जयंती।

Jan 14 2023

 ग्वालियर। विद्वत वरेण्य संत प्रवर अखिल भारतीय निर्मोही अनी अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष धीर समीर बंशीवट वृंदावन धाम के श्री महंत मदनमोहनदास जी महाराज ने कहा है कि भगवान श्रीराम ने सागर पर रामसेतु बनाया था लेकिन जगद्गुरु स्वामी रामानंदाचार्य जी ने भवसागर को पार करने के लिए शरणागति पुल बनाया। यह ऐसा दिव्य सेतु है जो आज भी है और जब तक दुनिया रहेगी तब तक यह सेतु रहेगा। यह सेतु राम के नाम के स्मरण उनके प्रेम का है उनकी शरणगति में जाने का है, जो भगवान की शरण में चला जाता है, उसका भवसागर से पार होना तय हैसंत प्रवर मदनमोहन दास जी शनिवार को सिद्धपीठ श्रीगंगादास जी की बड़ी शाला में जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी के जन्मोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की आसंदी से बोल रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता शाला के महंत पूरन वैराठी पीठाधीश्वर स्वामी रामसेवकदास जी महाराज ने कीश्री मदनमोहन दास जी ने कहा कि वास्तव में जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी के रूप में भगवान श्रीराम ही पैदा हुए थे। जिस तरह श्रीराम जी ने दुष्टता का विनाश किया और धर्म की स्थापना की उसी तरह रामनदाचार्य जी ने समाज से मतभेद, जात पात खत्म करने परस्पर द्वेषभाव मिटाने का काम किया। उन्होंने अनेक ग्रंथों की रचना की। उनकी परंपरा मे तुलसीदास जी  और नाभादास जी जैसे संत हुए। कबीर रैदास जैसे संतों को उन्होंने दीक्षित किया। आज हम सब समाज से द्वेष भेदभाव जात पांत मिटाने का संकल्प लें, तभी उनकी जयंती मनाने का महत्व हैइस अवसर पर अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में शाला के महंत स्वामी रामसेवकदास जी ने कहा कि स्वामी रामानंदाचार्य को मध्यकालीन भक्ति आंदोलन का महान संत माना जाता है। उन्होंने रामभक्ति की धारा को समाज के निचले तबके तक पहुंचाया। वे ऐसे आचार्य हुए जिन्होंने उत्तर भारत में भक्ति का प्रचार किया। उनके बारे में प्रचलित कहावत है कि - द्वविड़ भक्ति उपजौ-लायो रामानंद। यानि उत्तर भारत में भक्ति का प्रचार करने का श्रेय स्वामी रामानंद को जाता है। उन्होंने तत्कालीन समाज में व्याप्त कुरीतियों जैसे छुआछूत, ऊंच-नीच और जात-पात का विरोध किया।इससे पूर्व शाला में संत महंतों ने स्वामी रामानंदाचार्य जी का अभिषेक और पूजन किया