भागवत कथा के श्रवण से हमारे पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। घनश्याम शास्त्री जी मामा के बाजार गरीब दास बाबा मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में सुप्रसिद्ध भागवत आचार्य पं.घनश्याम शास्त्री जी महाराज ने कहा कि सत्संग करने से व्यक्ति के जीवन में काम, क्रोध, मद, लोभ, अभिमान, कामना का विनाश होता है, विवेक की जागृति के लिए सत्संग की परम आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समाज में जो बौद्धिक विकृतियों का प्रादुर्भाव हो रहा है उसका मूल कारण है सत्संग का अभाव है। जिस प्रकार शरीर के लिए भोजन की आवश्यकता होती है, ठीक उसी प्रकार मन की शुद्धि के लिए सत्संग से बढ़कर कोई अन्य साधन नहीं है। सत्संग से जीवन को सुंदर बनाया जा सकता है। जीवन को सुंदर बनाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को तन से श्रम अवश्य करना चाहिए, श्रम करने से शरीर पुष्ट और निरोगी रहता है, मन को संयमित बनाना चाहिए जो मन में आए वह नहीं करना है। अत: जो अपने जीवन के लिए कल्याणकारी है वही कार्य करना चाहिए। हमारी बुद्धि विवेकवती होनी चाहिए। जैसा आचरण स्वयं को अच्छा ना लगे ऐसा व्यवहार किसी भी व्यक्ति के साथ नहीं करना चाहिए विदुर जी का पावन प्रसंग सुनाते हुए शास्त्री जी ने कहा भगवान तो केवल प्रेम के भूखे हैं वह किसी के पदार्थों के भूखे नहीं हैं। परमात्मा को पत्र, पुष्प, जल जो भी अर्पित करें उसमें प्रेम और भाव का होना परम आवश्यक है। कहा कि हम सब भाग्यशाली है जो हमें हर त्योहार पर उच्च कोटि के संतों के प्रवचन,कथा श्रवण करने का मौका मिलता है हमें इसे व्यर्थ नहीं गवाना चाहिए आचार्य जी ने कहा कि भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य को वैभव और पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। जो सच्चे मन से भगवान को याद करता है, भगवान स्वयं प्रकट हो कर उनकी रक्षा करते है..

Jan 13 2023