संकष्टी चतुर्थी पर विघ्नहर्ता श्रीगणेश को लगा तिल-गुड़ का भोग

Jan 10 2023

ग्वालियर। माघ क्रष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी तिल चतुर्थी या सकट चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस साल संकट चतुर्थी, अंगारक चतुर्थी या वक्रतुंड के चतुर्थी के रूप में मनाई जा रही है। चतुर्थी तिथि में चंद्र देव की पूजा का विधान विशेष होने के कारण यह व्रतोदय तिथि में करना शास्त्र सम्मत होने के कारण इस साल संकष्टी चतुर्थी व्रत मंगलवार के दिन ही मनाया गया। संकष्टी चतुर्थी का पर्व मंगलवार को सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू हुआ जो आज बुधवार तक रहेगा। इस दिन विघ्नहर्ता श्री गणेश और चंद्र देव की पूजा करने से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
शिंदे की छावनी स्थित रिद्धि-सिद्धि गणेश मंदिर के पुजारी पं. राजेंद्र शर्मा ने बताया की संकष्टी चतुर्थी पर अर्जी वाले गणेश का देर रात तक स्नान के बाद विशेष श्रंगार किया गया। सुबह मंगला आरती के बाद तिल गुड़ के लड्डूओं का भोग लगाया गया। इस विशेष अवसर पर दर्शन एंव भोग के लिए मंगलवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का आना शुरु हो गया था। 
वहीं खासगी बाजार के प्राचीन मोटे गणेशजी पर भी सुबह से ही दर्शनार्थियों का तांता लगा हुआ है। इसके अलावा लधेड़ी स्थित प्राचीन गणेश मंदिर, कंपू स्थित उसरेटे सेन समाज के मंदिर, जीवाजी गंज गणेश मंदिर, सनातन धर्म मंदिर, अचलेश्वर मंदिर में भी भक्तों ने पहुंचकर श्रीगणेश के दर्शन कर तिल गुड़ का भोग लगाया।