जिनके पास प्रेम धन है-वो निर्धन हो नहीं सकता–'सुप्रसिद्ध भागवताचार्य
Jan 08 2023
पारदी मोहल्ला शिंदे की छावनी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में सुप्रसिद्ध भागवताचार्य पंडित श्री घनश्याम शास्त्री जी महाराज ने कहा कि राजा परीक्षित की मृत्यु सातवें दिन सर्प दंश से होनी थी। जिस व्यक्ति को यह पता चल जाए कि उसकी मृत्यु सातवें दिन होगी, वह क्या करेगा, क्या सोचेगा। राजा परीक्षित यह जानकर अपना महल छोड़ दिए। श्रीकृष्ण की ओर से राजा परीक्षित को दिए गए श्राप से मुक्ति के लिए उन्हें भाई सुखदेव से मिलने की कथा सुनाई। कहा कि भागवत कथा का श्रवड आत्मा का परमात्मा से मिलन करवाता है। सुखदेव मुनि ने राजा परीक्षित से कहा कि सब को सात दिन में ही मरना है। इस सृष्टि में आठवां दिन तो अलग से बना नहीं है। संसार में जितने भी प्राणी हैं। सभी परिचित हैं, सब की मृत्यु एक न एक दिन तो होनी है। जो मनुष्य एक बार आवाज श्रीमद् भागवत कथा श्रवण कर लें और उसे सुनकर जीवन में उतार लें तो उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। उसे भगवान की प्राप्ति हो जाती है। ज्ञान के बिना जीवन में अंधेरा है और आचरण के बिना जीवन की पवित्रता नहीं है। चेतना के विकास के लिए ज्ञान के साथ-साथ अच्छा आचरण होना जरूरी है आगे शास्त्री जी ने कहा कि ने श्रीकृष्ण सुदामा की दोस्ती पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि राजा हो या रंक दोस्ती में सभी बराबर हैं। सुदामा एक गरीब ब्राह्मण थे, लेकिन दिल से अमीर थे। सुदामा और कृष्ण जैसी मित्रता आज कहां है। सुदामा से श्रीकृष्ण ने मित्रता का धर्म निभाया। जिनके पास प्रेम धन है वह निर्धन नहीं हो सकता। दोस्ती में जात पात, ऊंच नीच, अमीर गरीब नहीं देखा जाता है। मित्रता को सच्चे मन से निभाने की जरूरत होती है। दोस्ती में स्वार्थ नहीं होनी चाहिए। इससे दोस्ती में दरार पैदा हो जाती है। मित्रता का धर्म निभाएं। सुख-दुख में भागीदारी हों। महंत नरेंद्र मिश्रा पप्पी महाराज,सरिता विष्णु मिश्रा ने भागवत पुराण की आरती की
संपादक
Rajesh Jaiswal
9425401405
rajeshgwl9@gmail.com
MP Info News
Invalid RSS feed URL.
ब्रेकिंग न्यूज़
विज़िटर संख्या
अन्य ख़बरें
-
-
-
*हेमू कालानी जन्मोत्सव मिष्ठान वितरण कर बनाया* *
—03/23/2019 -









