चाय की कुटिया से आत्मनिर्भर की डगर पर अग्रसर युवा

Dec 30 2022

ग्वालियर। यह कहानी है रीबा के निवासी भोपाल के टीआईटी इंजीनियरिंग कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में इसी साल स्नातक हुए, ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट के तृतीय वर्ष के छात्र शिवम सोनी की जो चाय की कुटिया नामक स्टार्टअप से आत्मनिर्भर बनने की डगर पर अग्रसर है। स्वाबलंबी बनने की चाह में केआरजी कॉलेज के बगल में चाय की स्टाल लगाकर प्यार व खुशी से ग्वालियर वासियों को चाय पिला रहे हैं। चाय के विभिन्न फ्लेवर उपलब्ध है। जिनमें अदरक, तुलसी, रोज, इलायची आदि प्रमुख है।  शिवम सुबह 6 बजे से रात 9  बजे तक कुल्लड़ वाली चाय का आनंद लोगों को दे रहे हैं।
शिवम सोनी ने बताया अभी 100 कुल्लड़ चाय प्रतिदिन बिक जाती है। जल्द ही स्नेक्स भी चालू करेंगे। उन्होंने बताया इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद 6 महीने नौकरी की। लेकिन नौकरी में मन नहीं लगा। संगीत के क्षेत्र में रुचि होने के कारण ग्वालियर के कॉलेज से प्राइवेट पढ़ाई भी कर रहा था इसीलिए ग्वालियर आ गया। और बचपन का व्यापार करने का सपना पूरा करने के लिए  चाय की कुटिया के नाम से छोटा सा स्टार्टअप किया है। 8 से 10 हजार की जेब खर्च की बचत से पिछले महीने शुरू हुआ स्टार्टअप से 15 हजार शुद्ध लाभ कमा चुका हूं। अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। उम्मीद है जल्द ही मुझे अपने सहायक की आवश्यकता होगी। तब मैं रोजगार देने वाला भी बन जाऊंगा।
शिवम बताते हैं, अब घर से खर्च के लिए पैसे मांगने की जरूरत नहीं पड़ती है। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। हम तीन भाई और एक बहन है। मैं सबसे बड़ा हूं और पिताजी प्राइवेट नौकरी करते हैं। जिससे जैसे-तैसे गुजर बसर हो रही थी। अभी स्टार्टअप के बारे में घर पर किसी को पता नहीं है। लोग जिस चाय के काम को कभी छोटा समझते थे। अब वही काम के युवाओं को रोजगार के साथ शोहरत भी दिला रहा है। जिसका उदाहरण टी-पॉइंट, चायोस, चाय सुट्टा बार, एमबीए चायवाला है। जिन्होंने चाय के स्टार्टअप से करोड़ों का व्यापार कर हजारों लोगों को रोजगार देने का काम किया है। इन स्टार्टप के सैकड़ों आउटलेट देश-विदेश में है। अगर भगवान की कृपा रही तो जल्द ही चाय की कुटिया के भी आउटलेट खुलेगें और हम रोजगार लेने वाले नहीं देने वाले बनकर उभरेगें।