देश पर बात आये तो अपने बाप के खिलाफ बोलो : कुमार विश्वास

Dec 27 2022

ग्वालियर। असूलों पर बात आए तो अपने खिलाफ भी बोलो, और देश पर बात आए तो अपने बाप के खिलाफ बोलो कविता की ये लाइनें जब देश-विदेश के प्रख्यात कवि कुमार विश्वास ने जब मंच से पढ़ीं तो ठिठुरन भरी सर्द रात में सामने उपस्थित हजारों युवाओं के रोंगटे खड़े हो गए। मौका था ग्वालियर के लाड़ले सपूत पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में अटल स्मृति मंच द्वारा जीवाजी खेल मैदान में आयोजित एक शाम अटलजी के नाम कवि सम्मेलन का। युवाओं में बेहद लोकप्रिय कवि कुमार मंच पर राजनीतिक रंग में नजर आए एवं उन्होंने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर जमकर तंज कसे एवं तालियां बटोरी। 
चाहे नोटबंदी से लेकर राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा हो या मध्यप्रदेश में सरकार परिर्वतन उन्होंने चिर-परिचित अंदाज में उपस्थित श्रोताओं को वाह-वाह करने पर मजबूर कर दिया। कवि सम्मेलन में देशभर से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से अटलजी को श्रद्धांजलि दी। पूर्व में अटल स्मृति मंच के संयोजक देवेन्द्र प्रताप सिंह तोमर ने कवियों का सम्मान शॉल ओढ़ाकर किया।
डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि ग्वालियरवासियों का सौभाग्य है कि उन्होंने अटलजी को इन गलियों में चलते देखा है। शायद ही युवाओं में किसी दिवंगत नेता के प्रति इतना क्रेज है, जितना हमारे हीरो और प्यारे अटल जी के प्रति है।
अटलजी एक समुद्र थे। अटलजी ने यही सिखाया कोई कुछ भी कह दें कुछ भी कर ले। उसके बाद भी अपनी मुस्कराहट जिन्दा रखिएगा शुरूआत करता हूं सुनिएगा-
मेरे जीने में मरने में तुम्हारा नाम आयेगा, मैं सांसें रोक लू फिर भी यही इलजाम आयेगा
हर एक धडक़न में तुम हो तो फिर अपराध क्या मेरा, अगर राधा पुकारेगी तो फिर घनश्याम आएगा।
किसी के दिल की मायूसी जहां से होके गूजरी है, हमारी सारी चालाकी वहीं पर खोके गुजरी है,
तुम्हारी और मेरी रात में बस फर्क इतना है, तुम्हारी सोके गुजरी है हमारी रोके गुजरी है। 
और युवाओ की मांग पर 
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता हैं मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है सुनाया। 
श्रोताओं के बीच उपस्थित केंद्रीय मंत्री नरेद्र सिंह तोमर, सांसद विवेक शेजवलकर एवं पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया उपस्थित थे। इससे पहले अन्य कवियों ने भी अपनी रचना पढ़ी। कविता तिवारी ने अपनी कविता पढ़ी।
भारत की आरती उतारने को आतुर हो, शौर्य की जवानी उपासक की कसम है।
अमर तिरंगा कभी झुकने ना देना तुम, चम्बल के पानी की रवानी की कसम है।
कवि सम्मेलन में रमेश मुस्कान, मुमताज नसीम, रामबाबू सिकरवार, शंभू शिखर, अजहर इकबाल, कुशल कुशवाह आदि कवियों ने उपस्थित जनसमूह को गुदगुदाने का काम किया और लोगों जमकर लुफ्त उठाया।