शब्दों का अभाव जन्म देता है गाली-गलौज को

Dec 18 2022

ग्वालियर। नगर निगम ग्वालियर एवं युवाह के संयुक्त तत्वाधान में स्थानीय बैजाताल पर बको मत बोलो कार्यक्रम का आयोजन शहरवासियों के बीच संपन्न हुआ। कार्यक्रम में समाज में अपनी जडें जमा चुकी गाली गलीज के चलन के 4 मुख्य आयाम  आचरण, आदत, अपराध एवं बच्चों पर इसका असर पर पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया। 
कार्यक्रम की शुरुआत शहर के उभरते हुए रॉक बैंड दी कोल्ड रूम म्यूजिक द्वारा संगीतमय प्रस्तुति देकर की गयी। कार्यक्रम संचालक सम्भव  नबील सिंह गैरी द्वारा बताया गया की गाली गलौज के चलन को हमने मूक सहमती प्रदान कर दी है। परन्तु एक सभ्य समाज के निर्माण के लिए इस चलन को जड़ से मिटाने की ज़रूरत है। इसके पश्चात पथ के संस्थापक विकास जैन द्वारा युवाह का परिचय देते हुए बताया गया की युवाओं को मानसिक समृद्ध, नैतिक शिक्षा और एक मंच प्रदान करने के लिए युवाह की शुरुआत इसी साल अक्टूबर में की गई। 
कार्यक्रम की चर्चा सत्र की शुरुआत श्रीमती मौशमी राणा द्वारा की गयी जिसमे उनके द्वारा युवाओं एवं समाज में गाली गलौज कैसे आचरण का हिस्सा बन गया है पर प्रकाश डाला गया। उनके द्वारा बताया गया की अब हम उस स्तिथि में आ गए हैं। की हम गाली को गाली समझते ही नहीं हैं वरन उसे आम बातचीत में सहायक के रूप में उपयोग करते हैं। यह आने वाली पीडिय़ाँ एवं बच्चों के लिए एक घातक समाज की नींव है। 
एडिशनल कमिश्नर नगर निगम शिशिर श्रीवास्तव द्वारा सोशल मीडिया एवं आज कल चलन में आये ओटीटी में जिस तरह गाली गलौज को एक आदत के रूप में दर्शाया जाता है पर चिंता व्यक्त की गयी। उनके द्वारा कहा गया की बीप की आवाज आज जान बूझ कर इस्तेमाल की जाती है ताकि श्रोता की जिज्ञासा बढे और वो ऐसी चीज़ों को बार बार देखे।
डीएसपी हिना खान द्वारा बताया गया की कानूनी रूप से छोटी से छोटी गाली किसी भी व्यक्ति को सज़ा के दायरे में ला सकती है। हम जिसे फैशन समझते हैं वो हमें न सिर्फ मुसीबत में डाल सकता है वरन हमारी सामाजिक छवि को पूरी तरह नष्ट कर सकता है। डीएसपी हिना खान  ने कहा की दु:ख की बात ये है की गाली गलौज अब फैशन बन चूका है एवं लडक़ों के साथ साथ लड़कियों में भी इसका व्यापक उपयोग देखने को मिल रहा है।
चाइल्ड वेलफेयर समिति की सदस्य श्रीमती संदीपा मल्होत्रा द्वारा बच्चों पर गाली गलौज के पडऩे वाले असर के बारे में विस्तार से बताया गया। उन्होंने बताया की हमें रोज ही किसी न किसी बच्चे की शिकायत गाली गलौज द्वारा प्रताडि़त करने की मिलती है। उन्होंने जोर दिया कि जो उदाहरण और आचरण हम बच्चों के सामने पेश करेंगे वैसा ही व्यवहार उनके भविष्य में देखने को मिलना तय है। इसलिए आवश्यक है की हम सब एक साथ होकर ये बीड़ा उठाएं की अपने बच्चों के लिए बदलाव के स्त्रोत बनें।
कार्यक्रम के श्रोताओ द्वारा पूछे गए सवालों पर मंथन हुआ एवं सवाल जबाव के साथ कार्यक्रम के समाप्ति हुयी।