शहर में पैदल घूमीं प्रियदर्शनी राजे सिंधिया, कैंसर पहाडिय़ा का नाम संजीवनी हिल क्यों न किया जाए
Dec 10 2022
ग्वालियर। सिंधिया घराने की महारानी व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शनी राजे सिंधिया ने शनिवार सुबह पैदल शहर की सडक़ों पर घूमकर शहर का मिजाज समझा है। वह सडक़ पर निकली तो लोगों का दिल भी जीत लिया। असल में वह सैर करती हुईं कैंसर हिल पर पहुंची, यहां लोगों से बातचीत की और अपने दिल की बात कही कि उनको इस रोड का यह नाम (कैंसर हिल) अच्छा नहीं लगता। यह नाम बहुत दर्द देता है। उनका सुझाव था कि यहां को लोगों के मत से इस पहाड़ी और रास्ते का नाम बदल जाए। बाद में संजीवनी हिल नाम भी बताया। यह पहला मौका है जब सिंधिया राज घराने की कोई महारानी इस तरह सडक़ पर पैदल आम इंसान की तरह घूमते हुए नजर आईं। अब राजनीतिक विशेषज्ञ इसे ज्योतिरादित्य सिंधिया के लोकसभा की जमीन को मजबूत करने की पहल मान रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में आने के बाद उनमें और उनके परिवार के सदस्यों में बहुत से बदलाव देखने को मिल रहे हैं। सिंधिया परिवार भी जानता है कि उनके लिए चुनौतियां बहुत बढ़ गई हैं। यही कारण है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद बेटा महा आर्यमन सिंधिया और अब पत्नी प्रियदर्शनी राजे सिंधिया भी लोगों के बीच पहुंची हैं। यह बात तो तय है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के मिशन 2024 लोकसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
प्रियदर्शनी राजे कैंसर पहाडिय़ा पर सुबह-सुबह महल से वॉक करते हुए पहुंची। लोगों के बीच सामान्य रूप से बैठकर कैंसर पहाडिय़ा का नाम बदलने को लेकर चर्चा की। लगभग 3 घंटे तक लोगों के बीच बैठकर प्रियदर्शनी राजे सिंधिया ने बातें की लोगों का हाल-चाल जाना। कैंसर पहाड़ी के नामकरण को लेकर पर्ची पर नाम कलेक्ट किए, लोगों से राय मशवरे के बाद कैंसर पहाड़ी का नाम शीतला संजीवनी हिल्स सहित दो अन्य नामों पर मंथन हुआ, इस दौरान प्रियदर्शनी राजे सिंधिया का सहज सरल और अलग अंदाज भी देखने को मिला।
मंगोड़े-पकोड़े का लुफ्त लिया, सेल्फी भी ली
सुबह की सैर के दौरान प्रियदर्शनी राजे ने लोगो के बीच पहुंचकर मंगोड़े-पकोड़ों का लुफ्त भी उठाया है। इतना ही नहीं पकौड़े बांटने वाली टीम के साथ अपने मोबाइल से सेल्फी भी ली। महारानी से चर्चा के बाद लोगों ने उनके इस कदम को सराहा है। केन्द्रीय मंत्री की पत्नी व सिंधिया राजघराने की बहू ने सडक़ों पर निकलकर आम लोगों का दिल जीत लिया।
सुबह सैर पर निकली प्रियदर्शनी राजे सिंधिया ने कहा कि अक्सर वह यहां से शिवपुरी, अशोक नगर, गुना सहित अन्य जगह जाने के लिए निकलती है, इसलिए यहां पर रहने वाले लोगों को वो जानती भी है। उन्हें हमेशा से कभी अच्छा नहीं लगा कि इस खूबसूरत पहाड़ी का नाम कैंसर पहाड़ी है। यह नाम दर्द देता है, जबकि यहां मध्य प्रदेश के 2 बड़े हॉस्पिटल हैं, जो लोगों को नया जीवन दे रहे हैं साथ ही खूबसूरत प्लांटेशन और खुली हवा मौजूद है फिर भी इसे कैंसर पहाड़ी के नाम से जाना जाता है। जिसे सुनकर शहर के साथ ही बाहर से आने वाले लोग भी नकारात्मकता फील करते हैं।
यही कारण है कि सबके साथ मिलकर पहल की है कि लोग यहां का नाम कुछ ऐसा रखें जिसे सुनकर पॉजिटिव फील हो लोग खुश हो। ऐसे में दो से तीन नामों पर चर्चा चल रही है। यहां पर रहने वाले, यहां पर रोज वॉकिंग करने वाले लोग मिलकर तय करेंगे कि आखिर इसका फाइनल नाम क्या रखना है जो पॉजिटिव फील वाला हो।
राजनीति में आने के सवाल पर कहा-थैंक्यू
प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया ने चर्चा में कई बातें कीं। इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि आप लगातार सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हैं तो राजनीति में कब आएंगी। इस सवाल पर थैंक्यू कहते हुए उन्होंने चर्चा को समाप्त कर दिया। इस पहाड़ी पर मॉर्निंग वॉक के लिए आने वाले पूर्व महापौर डॉ रघुनाथ पापरीकर के पुत्र अभय पापरीकर ने कहा कि यह पहाड़ी मांढऱे की माता पहाड़ी के नाम से विख्यात रही है।
लोगों ने उठाया अतिक्रमण का मुद्दा
इस अवसर पर लोगों ने पहाड़ी पर हो रहे अतिक्रमण का मुद्दा भी उठाया। लोगों ने कहा कि पहाड़ी पर लगातार अतिक्रमण होता जा रहा है। इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। लोगों का कहना था कि अतिक्रमण से पहाड़ी प्रदूषित हो रही है। इस पर श्रीमती सिंधिया ने कहा कि इस पर बाद में विचार होगा।
सिम्स के संचालक नीरज शर्मा ने कहा कि कैंसर पहाड़ी का नाम बदले जाने की एक अच्छी पहल है। प्रियदर्शिनी राजे ने जो पहल की है इससे निश्चित रुप से लोगों से आने वाले सुझाव के बाद एक नया नाम मिलेगा। उन्होंने पहाड़ी का नाम शीतला संजीवनी रखने की बात कही।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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