मनुष्य खुद के दुख से नहीं बल्कि दूसरों के सुख को देखकर दुखी है-गणिनी आर्यिकाश्री
Dec 06 2022
ग्वालियर। मनुष्य खुद के दुख से नहीं बल्कि दूसरों के सुख को देखकर दुखी है। स्पर्धा तुम में भी लगी है। तुम्हारी स्पर्धा के विषय भौतिक पदार्थ हैं। अगर तुम्हारे पास स्कूटी है तो तुम चाहोगे कि मोटर साइकिल आ जाए। व्यक्ति के पास वस्तु है तो उसका सुख नहीं होता बल्कि पड़ोसी की वस्तु देखकर दुख होता है। इसी की पूर्ति में तुम दिन भर लगे रहते हो। यह बात आज मंगलवार को गणिनी आर्यिकाश्री आर्षमति माताजी ने लोहामंडी स्थित दिगंबर लाला गोकुलचंद जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधिक करते हुए व्यक्त किए।
गणिनी आर्यिकाश्री ने कहा कि अगर इंसान अपने अंतर मन में झांके तो उसे कभी दुख की अनुभूति नहीं हो सकती। इंसान अपने दुख से दुखी नहीं है। दूसरों के सुख से दुखी है। प्राणी सुख की लालसा में भटकता फिरता है पर सच्चा सुख गुरुओं की वाणी जिनवाणी सुनकर और उन पर अमल करने से ही मिल सकता है। इंसान को नियम, संयम के अलावा अहंकार से दूर रहकर अपना जीवन निर्वाह कराना चाहिए। इंसान को भगवान ने जो दिया है, उसमें संतोष कर दूसरों को देखकर ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए।
पहली बार गणिनी आर्यिकाश्री को केवल जैन समाज के पुरुषों ने आहरचार्य बनकर ग्रहण कराई
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि गणिनी आर्यिकाश्री आर्षमति माता को लोहामंडी जैन समाज के पुरुषों ने शुद्ध पीले वस्त्र पहनकर अपने हाथों से पहली बार भोजन बनकर गणिनी आर्यिकाश्री की आहरचार्य (भोजन) कराया। गणिनी आर्यिकाश्री आर्षमति माता को नवधाभक्ति के साथ पहला विधि पडग़ाहन, दूसरी विधि उच्चासन, तीसरी पादप्रक्षालन, चौथी विधि पूजन, पांचवीं विधि गणिनी आर्यिकाश्री को आहार की मुद्रा ग्रहण करने का आग्रह किया। छठवीं विधि मन शुद्धि, सातवीं विधि वचन शुद्धि एवं आठवीं विधि काया शुद्धि के साथ भक्तजनो ने अपने ने नौवीं विधि के द्वारा आहार एवं जल शुद्धि बोलकर आर्यिकाश्री को आहार (भोजन) जल ग्रहण के साथ करते है। आहरचार्य के उपरांत आर्यिकाश्री को पिच्छी के साथ दीपों से आरती कर मंगल आशीर्वाद लिया।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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