एड्स से सावधानी व जागरूकता द्वारा बचा जा सकता है डॉ. मंगल

Dec 01 2022

ग्वालियर। रोग प्रतिरोधक क्षमता का प्रत्यक्ष प्रमाण हमें कोविड-19 के समय देखने को मिला। यही रोग प्रतिरोधक क्षमता एड्स संक्रमण में बचाव के लिये हो सकती है। 1 दिसम्बर विश्व एड्स दिवस पर सभ्य समाज में यौनजनित एड्स महामारी का फैलाव हमारी मानसिक विकृति को प्रदर्शित करता है जो कि छुआ-छूत की बीमारी न होकर सर्तक रहने की बीमारी को एड्स के रूप में माना जाता है जिसके लिये विश्व एड्स दिवस पर राष्ट्रीय सेवा योजना माधव महाविद्यालय ग्वालियर द्वारा एड्स पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि डॉ. मंगल, सेवा निवृत्त जेएएच हॉस्पीटल, डॉ. रविकांत अदालतवाले, डॉ. संजय रस्तोगी, डॉ. मनोज अवस्थी, डॉ. संजय कुमार पाण्डेय एवं डॉ. विकास शुक्ला उपस्थित थे। शपथ डॉ. संजय कुमार पाण्डेय द्वारा दिलाई गई।
डॉ. अदालतवाले ने बताया कि एड्स छुआछूत की बीमारी नहीं है ना ही एक दूसरे के साथ-साथ रहने से फैलती है जिससे बचने के लिये हमें कुछ उपाय करने चाहिये। एड्स बीमारी की जागरूकता के लिये एनएसएस को इसलिये चुना गया है कि एनएसएस समाज के सभी व्यक्तियों तक पहुँचता है और अपनी बात को हर वर्ग को बताने का प्रयास करता है।
डॉ. मंगल ने एड्स पर विस्तृत प्रकाश डालते हुये युवा पीढ़ी द्वारा एड्स दिवस पर जन-जन तक यह बात पहुंचाने का आव्हान किया। एड्स दिवस से इस बीमारी के बारे में फैली हुई अंतियों को दूर करना और एड्स पीडित व्यक्ति को सम्मान के साथ में समाज में स्थान देना ही प्रमुख उद्देश्य हैं। एड्स एक महामारी है और इसके ताजे आंकड़े चिंताजनक भी है। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज के लिये इसके संरक्षण द्वारा बचाव के द्वारा बचा जा सकता है।
डॉ. रस्तोगी ने बताया कि एड्स द्वारा पीड़ित व्यक्तियों को समाज के इस व्यवस्था में जोड़े और केम्पों के माध्यम से एनएसएस के स्वयं सेवक उनके लक्षण व सुझाव को जन-जन तक पहुंचायें। यौनजनित बीमारी होने के बावजूद भी यह गर्भवती माता को बिना एचआईवी जांच के रक्त चढ़ाने तथा स्तेमाल की गई इनजेक्शन के द्वारा फैलने की ज्यादा सम्भावना रहती है जिससे बचा जायें। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजय कुमार पाण्डेय एवं आभार डॉ. विकास शुक्ला ने किया।