भक्तामर मंत्रो की ऊर्जा से आपके शरीर के रोगों को करती है समाप्त-गणिनी आर्यिकाश्री

Nov 30 2022

ग्वालियर। भक्ती में ही शक्ती हैं। और जो शक्ती भगवान में हें वह शक्ती आपके अंदर भी आ सकती हैं, यह आपके अंदर की शक्तियां हैं आप उनसे कितना ले पाते हैं। आचार्य मानतुंगाचार्य की भक्ती में वह शक्ती थी जो उन्होंने अपने हृदय में भगवान को विराजित कर उनकी भक्ती में भक्तामर स्त्रोत की रचना कर दी। भक्तामर के दो सो अठ्ठाई पवित्र मंत्रो से भगवन आदिनाथ की आरधान करने से आपके सभी दु:ख समाप्त हो जायेगे। यह विचार गणिनी आर्यिकाश्री आर्षमती माताजी ने आज लोहामंडी स्थित दिगंबर लाला गोकुलचंद जैन मंदिर में भक्तामर महामंडल विधान में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।
गणिनी आर्यिकाश्री ने कहा कि प्रभु को गुणगान, स्तुति, भक्ति समर्पित होकर करता है। भक्ति कभी भी, किसी की भी नहीं की जाती, भक्ति तो वह है जो अंतरंग से होती है, अंतर अंतरात्मा समर्पण के साथ होती है। भक्तामर स्तोत्र मंत्र यह 100 बार जाप करके जल आंखों पर लगा लें तो औषधि का काम करता है। भक्तामर स्तोत्र भक्ति प्रधान स्तोत्र है, जैन धर्म काव्य परंपरा में भक्तामर स्तोत्र की अपनी माहातम महिमा और गरिमा हैं। भक्तामर महापूजन का फल पुण्यदायी है। पूजा से मन को शांति मिलती है। शरीर के रोग आदि व्याधि दूर होती है। 
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया की गणिनी आर्यिकाश्री आर्षमति माताजी के सानिध्य में विधानचार्य शशिकांत शास्त्री के मार्गदर्शन में इंद्रो ने भगवान आदिनाथ का कलशों से जयकारों के साथ अभिषेक किया। गणिनी आर्यिकाश्री अपने मुख्यबिंद से मंत्रो से भगवान जिनेंद्र की बृहद शांतिधारा राजेश पदमचंद जैन परिवार ने की। विधान में गणिनी आर्यिकाश्री आर्षमति माताजी ने भक्तामर के 48 काव्यों के मंत्रो उच्चरण कर इंद्रा-इंद्राणियो ने मुकुट माला पहनाकर भक्तिभाव के साथ 48 श्रीफल चढ़ाकर भगवान आदिनाथ की संगीतमय महाअर्चना पूजन कर महाआर्घ्य समर्पित करें।
भक्तामर विधान में ग्वालियर के प्रसिद्ध जैन समाज के गौरव संगीतकार शुभम जैन सैमी ने संगीतमय भजन...महावीर नाम लागे मुहे प्यारा-प्यारा...बाजे कुडलपुर में बधाई की नगरी में वीर जन्मे महावीर जी....छोटे बाबा रे पधरो मोरे अंगन रे....महावीर की मूंगावणी मूरत मनहारी कलश ढलो रे नार नारी....जैसे भजनो पर इंद्रा ओर इंद्राणियो ने जमकर भक्तिकर नृत्य किया।