भिन्न भाषा भिन्न भेष भारत अपना एक देश-कुशवाह

Nov 09 2022

ग्वालियर। हमारी भाषा रहन-सहन अलग-अलग हो सकती हैं परंतु हम वैचारिक रूप से राष्ट्र के प्रति एक हैं। यह बात राष्ट्रीय युवा योजना के तत्वाधान में जीनीयस इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल ग्वालियर में आयोजित राष्ट्रीय एकता एवं सद्भावना शिविर में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री भारत सिंह कुशवाह ने कहीं। उन्होंने कहा हमारे विभिन्न राज्यों की विभिन्न संस्कृति ही अनेकता में एकता का प्रतीक है। जो हमें वैचारिक और बौद्धिक स्तर पर जोड़े रखती है।
हॉकी इंडिया वोर्ड के उपाध्यक्ष देवेंद्र प्रताप सिंह तोमर ने कहा राष्ट्रीय एकता एवं सद्भावना शिविर में आज हम ग्वालियर में पूरे भारत के दर्शन कर रहे हैं। इसकी बुनियाद भाई (पद्मश्री डॉ एसएन सुब्बाराव) ने रखी थी। उसी का परिणाम है कि आज 18 राज्यों के 250 से अधिक युवक-युवतियों राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत करने के उद्देश्य शिविर में भाग ले रही हैं। श्री तोमर ने कहा राष्ट्र की एकता तथा सशक्त राष्ट्र निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। भविष्य में भारत का निर्माण युवाओं को करना है। जिसका प्रशिक्षण भाई जी ने अपने जीवन काल में लाखों युवक-युवतियों को दिया।
शिविर में देश की प्रमुख समस्याओं जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, भ्रष्टाचार, हिंसा, बेरोजगारी, पर्यावरण, प्रदूषण जैसे विभिन्न मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। जिसमें युवाओं ने अपने विचार रखे। सामूहिक खेल खिलाए गए जो भाई जी ने बरसों की मेहनत से तैयार किये। क्योंकि सामूहिक खेलों की भारत जैसे विशाल देश को एक रखने, भाईचारा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। सर्व धर्म प्रार्थना की गई क्योंकि राष्ट्रीय एकता तथा भारतीय संस्कृति को मजबूती प्रदान करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण माध्यम है। जिसमें अलग-अलग राज्यों की प्रस्तुतियां देखते ही बनती है। परंपरागत कलाओं का प्रदर्शन, सामूहिक भोजन, सामूहिक आवास, सामूहिक संसद कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। यही शिविर की विशेषताएं हैं जो एकता के सूत्र में युवाओं को बांधती है।
शिविर का संचालन कर रहे सुकुमारन, मधुसूदन दास, नरेंद्र, धर्मेंद्र, रन सिंह परमार, युवराज यादव ने बताया 5 दिवसीय शिविर में सुबह से शाम तक राष्ट्रीय एकता अखंडता को मजबूत रखने के लिए 12 प्रकार की गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें दिन-प्रतिदिन युवाओं में राष्ट्रीय एकता व अखंडता को मजबूत करने के प्रति दृढ़ संकल्प दिखाई दे रहा है। आज इस प्रकार के लाखों शिविर आयोजन की देश को आवश्यकता है।