सूतक काल में बंद रहें मंदिरों के कपाट, सूतक हटने के बाद हो सका दीपदान
Nov 08 2022
ग्वालियर। इस साल का आखिरी चंद्रग्रहण आगामी पूर्णिमा पर लगने लगा। चंद्रग्रहण से करीब 15 दिन पहले 25 अक्टूबर को लगे सूर्यग्रहण की तरह ही इस बार चंद्र ग्रहण भी देशभर में दिखाई देगा। देश में दृश्य होने के चलते इस ग्रहण का सूतक काल भी मान्य होगा, जिसके चलते मंदिरों के कपाट सूतक काल में बंद रहें। चंद्र ग्रहण की समाप्ति के बाद ही मंदिरों के कपाट खुलेंगे।
ज्योतिषाचार्य पं. धीरज दीक्षित के मुताबिक साल 2022 का आखिरी ग्रहण मंगलवार दोपहर 2.41 बजे से शुरू होकर शाम 6.20 बजे समाप्त हुआ। इसका मोक्ष काल शाम 7.25 पर रगा। वहीं, भारत में चंद्रग्रहण चंद्रोदय के साथ शाम 5.20 बजे से दिखना शुरू होगा, जो शाम 6.20 मिनट पर समाप्त हो रहा है। सूतक के दौरान बंद किए गए मंदिरों के कपाट ग्रहण के बाद खोले गए और मंदिर की साफ-सफाई कर शुद्धिकरण करने के बाद पूजा पाठ शुरू हुआ।
मंगलवार को कार्तिक पूर्णिमा होने के चलते दीपदान भी ग्रहण हटने के बाद ही किया गया। ग्रहण के अगले दिन या फिर एक दिन पहले भी स्नान-दान और दीपदान किया जाना मान्य रहेगा।
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक, मान्यता अनुसार सूतक काल में पूजा वर्जित मानी जाती है। इसलिए उचित होगा कि ग्रहण व सूतक के दौरान घर में ही रहकर भगवान का ध्यान करें। इस समय आप भजन-कीर्तन कर सकते हैं। इसके अलावा ग्रहण के दौरान भोजन आदि खाद्य पदार्थों में तुलसी की पत्ती डालकर रखनी चाहिए, जबकि ग्रहण के बाद कोई भी खाद्य पदार्थ ग्रहण करते समय तुलसी का होना अनिवार्य माना जाता है। ग्रहण में किया गया दान अमृत तुल्य माना गया है।
सूर्य, पृथ्वी व चंद्रमा एक सीध मेंआते हैं, तब पड़ता है चंद्र ग्रहण
ज्योतिष के मुताबिक जब सूर्य क्रांति मंडल में व चंद्रमा विमंडल में अपनी अपनी कक्षाओं में परिभ्रमण करते हैं और सूर्य से छह राशि के अंतर पर पूर्णिमा के दिन जब सूर्य, पृथ्वी, चंद्रमा एक सीध में होते हैं तो पृथ्वी की छाया चंद्रमा को ढक लेती है तब चंद्र ग्रहण होता है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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