हरिहर मंदिर पर उमड़ा भक्तों का सैलाब

Nov 07 2022

ग्वालियर। श्रीहरिहर का मंदिर में सोमवार की सुबह वैकुण्टी चौदस को दर्शन का विशेष महत्व है। इस प्राचीन मंदिर में प्रबोधिनी एकादशी से धार्मिक आयोजन किये जाते हैं। सुबह से ही श्री हरिहर मंदिर पर ाक्तों का आने का सिलसिला प्रारंभ हो गया जो रात तक अनवरत रूप से जारी रहा। यहां एक ही मूर्ति में भगवान शिव और भगवान विष्णु के दर्शन होते हैं।
 इस मंदिर में भगवान शिव और विष्णु के अलावा मां लक्ष्मी और मां पार्वती के दर्शन भी भक्तों को मिलते हैं इसलिए यहां भक्तों की भारी भीड़ लगती है। यहां विराजित यह प्रतिमा अलौकिक और अदभुद है तथा यह प्रतिमा कुंए से निकली थी जिसकी स्थापना इसी स्थान पर कराई गई।
हरिहर मंदिर के पुजारी ने बताया कि मंदिर 300 वर्ष से अधिक प्राचीन मंदिर है। हमारी चौथी पीढ़ी मंदिर की सेवा कर रही है। हमारे घर में कुआं था। परदादा को सपने से कुएं में देव मूर्ति होने का आभास हुआ। सुबह उठकर कुएं में झाककर देखा तो, एक मूर्ति नजर आई। जिसे कुएं से बाहर निकाला गया। यह प्रतिमा अद्वितीय थी। एक ही प्रतिमा में भगवान शिव, विष्णु, माता पार्वती व माता लक्ष्मी के साथ उनके चारों प्रिय वाहनों की छवि साफ नजर आ रही थी।
पुजारी ने बताया कि यहां वैकुंठ चौदस को दर्शन करने के लिए आने वाले श्रद्घालु मंदिर परिसर में पड़े ईट पत्थरों को जमाकर दो से तीन मंजिल तक मकान बनाते हैं। और उसमें दीप जलाने के साथ खील बतासे चढ़ाने के साथ अपने घर की मन्नत मांगते हैं। ऐसा श्रद्घालुओं का कहना है कि भगवान शिव और भगवान विष्णु के आशीर्वाद से जल्द ही अपने घर का सपना साकार होता है।
मंदिर की सेवा करने वाले पराडकर परिवार ने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन सुबह-शाम पूजा होती है। और दर्शनों के लिए मंदिर के पट प्रतिदिन सुबह छह बजे से रात नौ बजे तक खुले रहते हैं। वैकुंठ चौदस को इस दिव्य मूर्ति के दर्शन करने के लिए काफी संया में भक्त आते हैं। देव उठनी एकादशी से कार्यक्रम चल रहे हैं। यहां आज दूर-दूर से भक्तगण भगवान हरिहर के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।