साल में एक बार दर्शन देते हैं भगवान कार्तिकेय

Nov 07 2022

ग्वालियर। चन्द्रग्रहण लगने से एक दिन पहले जीवाजीगंज स्थित कार्तिकेय मंदिर के पट श्रद्धालूओं के लिये सोमवार को खोल दिये गये हैं। सोमवार प्रात: 4 बजे साल में एक बार कार्तिकेय मंदिर के दर्शन करने श्रद्धालूओं की लंबी लंबी कतारें लगना शुरू हो गई।
मंदिर प्रबंधन ने श्रद्धालूओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो इसके व्यापक प्रबंध किये। वहीं प्रशासन ने हनुमान चौराहा से रूट ड्रायवट कर वाहन चालकों को जीवाजीगंज की ओर नहीं जाने दिया। हनुमान चौराहे से जीवाजीगंज कार्तिकेय मंदिर तक Ÿद्धालूओं की भीड़ दिखाई दी। भगवान कार्तिकेय के दर्शन कर श्रद्धालूओं ने सुख समृद्धि की कामना की।
आपको बतादें कि 8 नवंबर को कार्तिक मास की पूर्णिमा पर चन्द्रग्रहण लगने जा रहा है। ऐसा होने से जीवाजीगंज स्थित कार्तिकेय मंदिर ग्रहण से एक दिन पहले सोमवार को 7 नवंबर को भक्तों के लिए खोला गया। कार्तिक भगवान का यह मंदिर 400 वर्ष से अधिक पुराना है और वर्ष में एक ही दिन भक्तों के लिए खोला जाता है। इस दिन यहां लोगों की अ‘छी- खासी भीड़ भी होती है। भगवान कार्तिकेय का मंदिर हर वर्ष कार्तिेक मास की पूर्णिमा को खोला जाता है। 
लेकिन इस बार इस दिन चन्द्रग्रहण होने से यह मंदिर 7 नवंबर को सुबह 4 बजे से भक्तों के लिए खोला गया। रात्रि 12 बजे से भगवान का अभिषेक और श्रंगार किया। सुबह 4 बजे से भक्त भगवान के दर्शन करना शुरू कर दिया जो सोमवार की रात्रि 12 बजे तक करेंगे। मंदिर प्रांगण में भगवान कार्तिकेय के साथसाथ हनुमान जी, गंगा, जमुना, सरस्वती और लक्ष्मीनारायण के मंदिर भी हैं। यहां प्रतिदिन भक्त पूजा अर्चना करते हैं, लेकिन वर्ष में कार्तिकेय मंदिर के पट साल में सिर्फ एक दिन पूर्णिमा पर खुलते हैं। इसी दिन भक्त भगवान कार्तिकेय की पूजा अर्चना व दर्शन कर पाते हैं। 
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने दोनों पुत्र गणेश और कार्तिकेय के बीच एक प्रतियोगिता रखी। जिसमें दोनो में से जो तीनों लोक की परिक्रमा करके सबसे पहले अपने माता-पिता के पास आएगा वह प्रथम पूज्य हो जाएगा। उसकी पूजा सबसे पहले की जाएगी। जब प्रतियोगिता शुरू हुई तो भगवान गणेश ने माता-पिता की परिक्रमा लगाई, क्योंकि उनमें तीनों लोक समाहित हैं। इनकी इस बुद्धिमता से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि उनकी पूजा सभी देवी देवताओं से पहले होगी। 
जब कार्तिकेय तीनों लोक की परिक्रमा लगाकर वापस लौटे तो देखा कि गणेश जी की जय जयकार हो रही थी। सभी ने उन्हें प्रथम पूज्य मान लिया था। ये देख कार्तिकेय को बहुत क्रोध आया और खुद को एक गुफा में बंद कर श्राप दिया कि जो महिला उनके दर्शन करेगी विधवा हो जाएगी। साथ ही जो पुरुष उनके दर्शन करेगा, वह सात जन्मों तक नरक भोगेगा। इस श्राप के चलते हाहाकार मच गया।
इसके बाद भगवान शिव ने कार्तिकेय को समझाया तो इनका क्रोध शांत हुआ। भगवान शिव ने वरदान दिया कि कार्तिकेय के जन्मदिन यानी कार्तिक पूर्णिमा पर उनके दर्शन किए जा सकेंगे, जो इस दिन उनके दर्शन कर पूजा करेगा उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। इसलिए साल में एक दिन कार्तिकेय मंदिर के पट खुलते हैं।
पुलिस बल ने संभाला मोर्चा
भक्तों की सुविधा और मंदिर परिसर के सामने जाम आदि की समस्या ना निर्मित हो इसके लिए गत रात्रि में ही मंदिर के पट खुलते ही पुलिस बल ने मोर्चा संभाल लिया था और मंदिर परिसर में महिला और पुरुष पुलिस कर्मी तैनात किए गए। ताकि भक्तगणों को किसी प्रकार की असुविधा ना हो और भक्तगण श्रद्धाभाव के साथ भगवान कार्तिकेय के दर्शन कर पूजा-अर्चना कर सकें।