ग्वालियर आरटीओ का नया कारनामा एक ही नंबर की दो-दो गाडिय़ां, करे कोई, भरे कोई

Nov 05 2022

ग्वालियर। ग्वालियर आरटीओ की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है। हर समय चर्चा में रहना विभाग की आदत सी बन गई। इन दिनों एक मामले ने आरटीओ का ऐसा कारनामा उजागर किया जिसे सुनकर हर कोई कह रहा है ऐसा नहीं हो सकता, लेकिन ऐसा हुआ है। और यातयात के नियम किसी और ने तोड़े हैं जबकि चालान किसी और के पास पहुंच गया। पीडि़त व्यक्ति ने अपनी व्यथा परिवहन विभाग के साथ-साथ स्थानीय थाना पुलिस को बताई ताकि भविष्य में उसकी गाड़ी के नाम पर कोई बड़ी दुर्घटना ना हो जाए और कोई इसकी गाड़ी के नंबर का दुरुपयोग नहीं कर पाए।
उल्लेखनीय है कि ग्वालियर परिवहन विभाग में कब क्या हो जाए कहना मुश्किल ही नहीं बल्कि असंभव सा प्रतीत होता है। रोज नए-नए कारनामे विभाग में होते रहते हैं बाबजूद इसके परिवहन विभाग इन पर अंकुश लगाने में सफल नहीं हो सका जिसके कारण एक ही नंबर दोदो गाडिय़ां शहर में फर्राटे मारकर दौड़ रहीं हैं। परिवहन विभाग अपनी गलती ना मानकर एजेंसी के मत्थे मढ़ रहा है। 
ऐसा ही एक प्रकरण प्रकाश में आया जिसमें निबालकर की गोठ नंबर दो हुजरात पुल ग्वालियर निवासी प्रवीण अरोरा के नाम पर परिवहन विभाग में ग्रे एम रंग की स्कूटी रजिस्टर्ड है। जिसका रजिस्टे्रशन नंबर एमपी07-एसएन9806 है और यह स्कूटी 14 मार्च 2020 को ग्वालियर परिवहन विभाग में रजिस्टर्ड हुई है। ठीक इसी नंबर एमपी07-एसएन 9806 की सफेद रंग की स्कूटी भी शहर में फर्राटे मारकर दौड़ रही है।
सफेद रंग की स्कूटी यातायात के नियमों का उल्लंघन करती है और  यातायात थाना पुलिस द्वारा ई-चालान निबालकर की गोठ नंबर दो निवासी प्रवीण अरोरा के निवास पर पहुंच गया। अब जिस गाड़ी ने यातायात के नियमों का उल्लंघन ही नहीं किया उसे चालान भेजकर तो वही कहावत चरितार्थ हो गई कि करे कोई और भरे कोई। 
अब पीडि़त प्रवीण अरोरा परिवहन विभाग से लेकर यातायात थाना तक चकर लगा रहे हैं। पर उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ और जो गलती उनके द्वारा नहीं की गई उसका हर्जाना उन्हें देने के लिए बाध्य किया जा रहा है।
परिवहन विभाग का यह कारनामा कोई पहला नहीं बल्कि इससे पहले भी कई ऐसे कारनामे हो चुके और आज शहर में एक ही नंबर की कई गाडिय़ां फर्राटे मारकर दौड़ रही है। बाबजूद इस पर ना तो परिवहन विभाग कोई एक्शन ले रहा है और ना ही यातायात विभाग। ऐसे में बेकसूर पीडि़त व्यक्ति अपनी पीड़ा किसे बताए यह विचारणीय प्रश्न है। 
पीडि़त ने परिवहन विभाग में की शिकायत
पीडि़त प्रवीण अरोरा के निवास पर जब ई-चालान पहुंचा तो वह हेरान रह गए, और इस संबंध में परिवहन विभाग में आला अधिकारियों से चर्चा की। लेकिन उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। हां इतना जरूर मालूम चला कि इस नंबर पर उन्हीं की गाड़ी का नंबर रजिस्टर्ड है। 
कहने का तात्पर्य है कि फिर दूसरा नंबर किसका है यह कैसे पता चलेगा। तकरीबन दो लाख एटिवा ग्वालियर में है। ऐसे दूसरी एक्टिवा वाले को कैसे पकड़ा जाएगा। फिलहाल पीडि़त की ई-चालान की समस्या का कोई समाधान नहीं निकला। पीडि़त ने एहतियातन अपनी पीड़ा को थाटीपुर थाने में शिकायत के रूप में बता दिया। ताकि अगर कोई इस नंबर का पुन: दुरुपयोग करे तो वह अपना बचाव कर सके।