सूबेदार को टावर लगवाने का झांसा देकर 28 लाख ठगने वाले दो ठग बिहार से पकड़े

Nov 03 2022

ग्वालियर। आर्मी के सूबेदार को टावर लगवाने का झांसा देकर 28 लाख रुपए ठगने वाले दो ठग बिहार से पुलिस ने पकड़े हैं। इन लोगों ने सूबेदार के अलावा देश के अलग-अलग शहरों में रहने वाले कई लोगों को ठगा है। दोनों आरोपी महज हाईस्कूल पास हैं। लेकिन ठगी कई पढ़े लिखे लोगों से की है। जैसे ही यह दोनों आरोपी पकड़े गए तो लश्कर इलाके का रहने वाला एक व्यापारी भी शिकायत लेकर पहुंच गया, उसके साथ भी टावर लगवाने के नाम पर दस लाख रुपए की ठगी हुई है। अभी इनका मास्टरमाइंड नहीं पकड़ा गया है, उसकी तलाश में पुलिस लगी है।
हजीरा स्थित वैष्णोपुरम के रहने वाले रामनरेश प्रजापति आर्मी में सूबेदार हैं। वह असम में पदस्थ हैं। उनके पास अंजान नंबर से काल आया था, उसने उनके प्लाट पर टावर लगवाने का झांसा दिया था। एकमुश्त 45 लाख रुपए और हर माह 90 हजार रुपए किराया मिलने का झांसा देकर फंसाया। सूबेदार उसकी बातों में आ गए। इसके बाद अलग-अलग किस्तों में 28 लाख रुपए जमा कर दिए। फिर इन्हें रकम देने के लिए बैंगलुरू बुलवाया, इन लोगों ने झांसा दिया था कि हिंदुस्तान टावर नाम से बैंगलुरु में इनकी कंपनी है। जब यहां पहुंचे तो यहां कोई नहीं मिला। इसके बाद जब इन लोगों के नंबर पर काल किया तो फोन उठाना बंद कर दिया। तब सूबेदार को ठगी का पता लगा। उन्होंने हजीरा थाने में एफआइआर दर्ज कराई। 
एसएसपी अमित सांघी ने बताया कि इस मामले की पड़ताल में सीएसपी महाराजपुरा रवि भदौरिया और उनकी टीम को लगाया। करीब दो माह से टीम पड़ताल कर रही थी। आठ दिन पहले आरोपियों के बारे में अहम सुराग मिला। इसके बाद टीम बिहार रवाना की गई। यहां से दो आरोपियों को पकड़ा। पकड़े गए आरोपियों के नाम मोनू राजपूत निवासी पटना और दूसरे का नाम सोनू जायसवाल निवासी गोविंदपुरा पूर्वी चंपारण बिहार बताया गया है। दोनों ही हाईस्कूल पास हैं। इनके पास से मोबाइल, लैपटाप और करीब 26 हजार रुपए बरामद हुए। पूछताछ में इन्होंने रामनरेश को ठगने की बात स्वीकार की। इसके अलावा भी कई लोगों को ठगा है।
झारखंड की महिलाओं को भी ठगा, इनसे रकम लेकर सूबेदार से इनके खाते में भिजवाए रुपए
झारखंड की रहने चाली चांदनी मिश्रा औश्र सुधा रानी बेसवा को भी ठगा है। इनसे लाखों रुपए टावर लगवाने के नाम पर लिए। जब इन महिलाओं ने रुपए न आने की बात कही तो सूबेदार से इनके खाते में रुपए डलवाए। फिर दोबारा उन महिलाओं से रुपए मांगे।
पुलिस को उलझाने के लिए इन ठगों ने शातिर तरीका अपनाया था। इनके पास कुछ एजेंट थे, जो 10 हजार रुपए में इन्हें मजदूरों के नाम की सिम उपलब्ध करा देते थे। मजदूरों को एजेंट लोन और सरकारी सुविधाओं से जुड़े कार्ड बनवाने का झांसा देकर इनसे दस्तावेज लेते थे। इन दस्तावेजों से फर्जी सिम खरीदते थे। इसी तरह खाते भी किराये पर ले लेते थे।
कई ऐसी बेवसाइट हैं, जिन पर विज्ञापन चलते हैं। इन पर अपनी ठगी की दुकान का आनलाइन विज्ञापन चलवाते थे। बाजारों में पोस्टर भी लगवाते थे। यहीं से लोग इनके झांसे में आ जाते थे।