जीवन की यात्रा का साफल्य तभी है जब हम मंजिल तक पहुंचे:पराड़कर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू, कवि सम्मेलन आयोजित

Oct 29 2022


ग्वालियर,नसं। जन्म से लेकर मृत्यु तक जीवन की एक यात्रा है। ये यात्रा तभी सफल मानी जाएगी जब हम मंजिल तक पहुंचे। खाओ, पिओ और मौज करो ही जीवन नहीं है, बल्कि हम कहां से आए हैं, क्यों आए हैं, हमारे जीवन का उद्देश्य क्या है? इसे जानना और समाजहित में काम करना ही जीवन का साफल्य हैयह बात मुख्यवक्ता की आसंदी से अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्रीधर पराड़कर ने दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में कही। नई सड़क स्थित माधव महाविद्यालय के सामने राष्ट्रोत्थान न्यास के विवेकानंद सभागार में मध्य भारतीय हिन्दी साहित्य सभा ग्वालियर एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद के संयुक्त तत्वावधान में जीवन साफल्य का प्रतीक यात्रा साहित्य विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के मुख्य अतिथि जिलाधीश डॉ. कौशलेन्द्र विक्रम सिंह थे। सभा अध्यक्ष डॉ.कुमार संजीव एवं सभा उपाध्यक्ष दिनेश पाठक भी मंचासीन थे। श्री पराड़कर ने कहा कि जीवन यात्रा अपने आपको पहचानने की यात्रा है। जब हम घर से बाहर निकलते हैं तो हमारा विस्तार होता है। यात्रा के दौरान अगर दूसरे प्रदेश मेें मध्यप्रदेश का व्यक्ति मिलता है तो हमें महसूस होता है कि यह तो हमारे यहां का है। इसी तरह सृष्टि से तादात्म्य स्थापित होता है। पेड़, पानी और हवा के बिना हमारा जीवन नहीं चल सकता है। इन्हें बचाना भी हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद को भी कन्याकुमारी में इस बात का अहसास हुआ कि आत्मा का मोक्ष और जगत हित में काम करना ही जीवन यात्रा है। महात्मा गांधी ने भी यात्रा के द्वारा समाज को जाना और अपने आप को पहचानासंस्कृति को कोई नहीं जीत सकता: सिंहमुख्य अतिथि जिलाधीश कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने कहा कि राजा दूसरे राज्य को जीत सकता है, लेकिन वह वहां की संस्कृति और साहित्य को नहीं जीत सकता है। उन्होंने कहा कि संस्कृति को जोडऩे की भारत की प्राचीन पंरपरा रही है। भगवान राम, श्रीकृष्ण और शंकराचार्य के उद्धरण देते हुए उन्होंने यात्रा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम के प्रारंभ में सरस्वती वंदना अर्चना बामनगया एवं परिषद गीत एकता गोस्वामी ने प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत सभा अध्यक्ष डॉ.कुमार संजीव ने किया। स्वागत भाषण दिनेश पाठक ने दिया। अतिथियों को स्मृति चिन्ह धीरज शर्मा ने भेंट किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ.करुणा सक्सेना एवं आभार सभा अध्यक्ष डॉ.कुमार संजीव ने व्यक्त कियाबॉक्सइंगित और इज्जत के रहबर का विमोचनइस अवसर पर अतिथियों ने इंगित पत्रिका और डॉ.पद्मा शर्मा के कहानी संग्रह इज्जत के रहबर का विमोचन किया। एमएलबी महाविद्यालय की प्राध्यापक डॉ.पद्मा शर्मा की यह 10वीं पुस्तक है। इस कहानी संग्रह की विशेषता यह है कि इसमें नौ कहानियों के साथ-साथ एक कहानी के पांच भाषाओं के अनुवाद भी शामिल है। उद्घाटन सत्र के बाद जीवन साफल्य का प्रतीक यात्रा साहित्य विषय पर देश के विभिन्न प्रांतों के 50 से अधिक आमंत्रित अतिथियों ने मंथन किया। दिन में तीन चर्चा सत्र के बाद शाम को कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार मुरारी लाल गुप्त गीतेश, डॉ.सुरेश सम्राट, राजकिशोर वाजपेयी, डॉ.लखनलाल खरे, उपेन्द्र कस्तूरे, रामचरण रुचिर, डॉ.मंदाकिनी शर्मा, डॉ.लोकेश तिवारी, दिलीप मिश्रा आदि उपस्थित थेसंगोष्ठी का समापन आजदो दिवसीय इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन 30 अक्टूबर को राष्ट्रोत्थान न्यास के विवेकानंद सभागार में होगा। रविवार को प्रात: 9 बजे से चार सत्र आयोजित होंगे एवं शाम 4 बजे इसी स्थान पर समापन समारोह भी आयोजित होगा। जिसके मुख्य अतिथि मंत्री भारत सिंह कुशवाह होंगे। अध्यक्षता भारतीय पर्यटन एवं प्रबंध संस्थान (आईआईटीटीएम) ग्वालियर के डायरेक्टर प्रो. आलोक शर्मा करेंगे। मुख्यवक्ता अभा साहित्य परिषद की राष्ट्रीय मंत्री डॉ. साधना बलबटे होंगी