खुद करना होगा अपना काम, दूसरों के भरोसे नहीं पहुंच सकते मंजिल तक-मुनिश्री

Oct 15 2022

ग्वालियर। हमे दूसरों के भरोसे नहीं रहना है अपना कार्य खुद करना है। दूसरों के भरोसे रहने वाला कभी अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सकता है। धन और बाहरी सामग्री कभी दु:खों से छुटकारा नहीं दिला सकती फिर भी हम इनको एकत्रित करने में जुटे रहते है। लगता हमे परमात्मा की वाणी पर भी विश्वास नहीं करते है। संसार सागर से पार होने के लिए पाप का प्रत्याख्यान जरूरी है। यह बात श्रमण मुनिश्री विनय सागर महाराज ने शनिवार को सोलह दिवसीय शांतिनाथ महामंडल विधान में माधवगंज स्थित चातुर्मास स्थल अशियाना भवन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही।
मुनिश्री ने कहा कि शब्दों से कभी आत्मा का समाधान नहीं हो सकता बस अपना काम निकाल सकते है। स्वयं को सजाने - संवारने में व्यस्त रहने वालों के लिए सभी तरह के दु:ख उपलब्ध होते है। शरीर मेकअप के लिए नहीं कर्मो को क्षय करने के लिए मिला है। मेकअप का मतलब जो है उसे छुपाना और जो नहीं है उसे दिखाना होता है। ऐसा करके हम मिथ्यात्व में उलझ रहे है। धर्म को अधर्म कहना या अधर्म को धर्म कहना मिथ्यात्व है। जो नहीं है उसे दिखाने का प्रयास करने वाला सभी प्रकार के दु:खों को उपलब्ध रहता है।
हम कुछ पाने के चक्कर में मिले हुए का लाभ भी नहीं लेते
मुनिश्री ने कहा कि हम कुछ पाने के चक्कर में जो मिला हुआ है उसका भी लाभ नहीं ले पाते है। हम उसके पीछे भागते है जो पास में नहीं है। जो मिला हुआ है उसकी कीमत समझ नहीं आती है। जिंदगी में जो मिला हुआ वह तो नहीं खोना चाहिए। मानव जीवन का मौल पहचानना होगा। इसे गंवाने पर तिर्यंच गति, इसमें लाभ जोडऩे पर देव गति और इसमें कर्म चढ़ाने पर नरक गति मिलती है। हमारा लक्ष्य इसमें लाभ जोडऩा होना चाहिए न कि कर्म बढ़ाकर मूल पूंजी को भी गंवा दे। दान-पुण्य करने से आत्मा लाभ में रहेगी