महानायक जेपी ने लोकतंत्र की फिर स्थापना की
Oct 11 2022
ग्वालियर। लोकतंत्र सेनानी संघ के तत्वावधान में संपूर्ण क्रांति के महानायक स्वतंत्रता सेनानी स्व.जयप्रकाश नारायण का 121 वां जन्मदिन वीरांगना लक्ष्मीबाई के समाधि स्थल पर मनाया। इस अवसर पर साहित्यकार जगदीश तोमर ने कहा कि आपातकाल लोकतंत्र का वह काला अध्याय है जिसे भुलाया नहीं जा सकता। लोकनायक जयप्रकाश ने देश में लोकतंत्र की फिर से स्थापना के लिए जो लड़ाई लड़ी वह अकल्पनीय थी।
संगठन के राष्ट्रीय सचिव मदन बाथम ने लोकनायक के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1929 में जब वे अमेरिका से लौटे तब भारतीय स्वतंत्रता संग्राम तेजी पर था।
1932 में गांधी, नेहरु और अन्य नेताओं साथ स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए और उन्होंने आंदोलन का नेतृत्व भी किया। कई बार उन्हें गिरफ्तार किया गया। आजादी के बाद उन्हें एक बार फिर लोकतंत्र की बहाली के लिए लड़ाई लडऩी पड़ी। जयप्रकाश सहित एक लाख से अधिक लोगों को आपातकाल का विरोध करने पर जेल में डाल दिया गया था। जेल में उनकी तबियत बिगड़ी तो उन्हें सात माह बाद जेल से रिहा कर दिया गया।
1977 में जेपी के प्रयासों के बाद एकजुट विपक्ष में इंदिरा गांधी को चुनाव में हरा दिया था। उन्हें 1999 में भारत का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। जिलाध्यक्ष गुलशन गोगिया ने स्वागत भाषण दिया। स्वागत भाषण राजेन्द्र आर्य ने किया। गोपाल गांगिल ने आभार व्यक्त किया। एडवोकेट जीपी गर्ग, भानूप्रकाश जैन, जयेन्द्र पाल खुराना, रामबाबू सेन, पुनीत सक्सेना, बृजमोहन श्रीवास्तव आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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