बहोड़ापुर पुलिस को चकमा देकर फरार हुआ हत्यारा झांसी के बरुआ सागर से गिरफ्तार
Oct 03 2022
ग्वालियर। क्राइम ब्रांच की टीम ने पुलिस को चकमा देकर फरार शतिर अपराधी को गिरफ्तार कर लिया है। क्राइम ब्रांच ग्वालियर द्वारा वर्ष 2013 में थाना बहोड़ापुर में छात्र की अपहरण कर हत्या के प्रकरण में सालों से फरार 10 हजार रुपए के इनामी आरोपी को गत 23 सितंबर को गिरफ्तार किया था। आरोपी के पकड़े जाने पर बहोड़ापुर थाना पुलिस कोर्ट पेशी से पहले उसकी उम्र का वैरिफिकेशन करने के लिए उसे लेकर घासमण्डी स्थित स्कूल लेकर गई थी। यहां पर मुकेश परिहार एसआई तथा दो हवलदारों को गच्चा देकर फरार हो गया था। उसके फरार होने पर पुलिस कप्तान अमित सांघी ने टीआई सहित एक एसआई और दो प्रधान आरक्षकों को लाइन अटैच किया था।
23 सितंबर को बहोड़ापुर पुलिस की गिरफ्त से भागे छात्रा के अपहरण व हत्या के आरोपी को क्राइम ब्रांच की टीम ने झांसी के बरुआ सागर से काफी मशक्कत के बाद पकड़ लिया। आरोपी को क्राइम ब्रांच ने 10 साल बाद दिल्ली से पकड़ा था। पुलिस की गिरफ्त से फरार होने के बाद से ही क्राइम ब्रांच उसकी तलाश में थी।
फरार आरोपी की तलाश हेतु क्राइम ब्रांच की टीमों को गाजियाबाद, दिल्ली, मथुरा, झांसी रेल्वे स्टेशन, मऊरानीपुर, पृथ्वीपुर, निबाड़ी, बरूआसागर भेजा गया। इसी क्रम में एसएसपी अमित सांघी को जरिए मुखबिर सूचना प्राप्त हुई कि उक्त अपहरण कर हत्या के प्रकरण में फरार आरोपी बरूआ सागर जिला झांसी में छिपा हुआ है।
एसएसपी अमित सांघी ने बताया कि आरोपी मुकेश परिहार 2013 में छात्रा के अपहरण व हत्या के बाद से फरार था। इस हत्या में शामिल अन्य आठ आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। लेकिन आरोपी दिल्ली में छिपकर रह रहा था। क्राइम ब्रांच ने बड़ी मुश्किल से 10 साल बाद आरोपी को दिल्ली से दबोचा था। चूंकि मामला बहोड़ापुर थाने का था। इसलिए आरोपी मुकेश परिहार को बहोड़ापुर पुलिस को सौंप दिया था। लेकिन आरोपी पुलिस को चकमा देकर भाग निकाला।
इसके बाद क्राइम ब्रांच लगातार आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही थी। इस दौरान पता चला कि आरोपी अपनी ससुराल बरुआ सागर में छिपा हुआ है। पुलिस ने आरोपी को बरुआ सागर से गिरफ्तार कर लिया।
क्राइम ब्रांच की टीम आरोपी के रिश्तेदारों पर नजर रखी हुई थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि आरोपी प्रथ्वीपुर में अपने बहनोई के घर पर छिपा हुआ है। इसलिए पुलिस बहनोई के घर पर नजर रखे हुए थी। 2 अक्टूबर को आरोपी के बहनोई से मिलने एक रिश्तेदार आया। वह बहनोई से मिलने के बाद बरुआ सागर वाली बस में सवार हुआ। उसके पीछे भी दो पुलिस कर्मी बस में गए। इसके बाद जब बरुआ सागर में आरोपी ससुराल के जिस घर में था। उसमें गया। इसके बाद आरोपी उसी के साथ बाहर निकला और कहीं जाने लगा। बीच रास्ते में ही आरोपी को दबोच लिया। उस समय आरोपी ने अपना नाम भी गलत नाम सोनू रायकवार बताया। लेकिन पुलिस उसे ले आई।
पूछताछ पर आरोपी द्वारा बताया कि वह भागने के बाद सीधा बिजौली गया, उसके बाद पैसे व कपड़ों की व्यवस्था करने के बाद ट्रेन से गाजियाबाद अपनी पत्नि के पास पहुंचा था। उसके बाद नई दिल्ली से उक्त आरोपी अपनी ससुराल के मकान नगरा थाना प्रेमनगर (झांसी) में पहुंचा। अपने माता-पिता को लेकर अपनी ससुराल के गांव ढीमर मौहल्ला बरूआसागर में 27 सितंबर से छिप कर रह रहा था।
आरोपी के द्वारा पकड़े जाने के डर से मोबाइल का उपयोग नहीं किया जा रहा था। उक्त हत्या एवं अपहरण व पुलिस कस्टडी से फरार आरोपी पुलिस गिरतारी के डर से लगातार ठिकाने बदल-बदल कर फरारी काट रहा था। वह अपने माता-पिता को लेकर 4 अक्टूबर को झांसी रेल्वे स्टेशन से अपने रिश्तेदार की मदद से मंगला एक्सप्रेस द्वारा मुबई जाकर बसने का प्लान था, जिससे पुलिस उसे कभी नहीं पकड़ पाती।
एक बार स्टार्ट हुई कार ग्वालियर आकर ही रूकी
आरोपी के भागने की हरकत से वाकिफ क्राइम ब्रांच ने उसे कार में इस तरह बिठाया कि वह भाग ना सके और इसके हाथ और पैर बांध दिए। एक बार स्टार्ट हुई कार सीधे ग्वालियर आकर ही रूकी। इसके बाद भी उसकी निगरानी के लिए चार जवान तैनात रहे, जिससे किसी तरह की लापरवाही ना हो।
आरोपी ने अपने अपने आप को घोषित कर लिया था मरा
2013 में छात्रा के अपहरण और हत्या के बाद आरोपी ने अपने आप को मरा हुआ घोषित कर लिया था और दिल्ली में रहने रहने लगा था। लेकिन पुलिस को इसके जिंदा होने का पता पुलिस को चला और इसके ऊपर 10 हजार का ईनाम भी घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस दिल्ली से उसे उठा लाई। लेकिन बहोड़ापुर पुलिस के कब्जे से आरोपी भाग गया।
आप को बतादें कि 2012 में छात्र प्रांकुल शर्मा का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई थी। लाश डबरा में सिंध नदी के किनारे रेत में दफना दी गई थी। इसमें नौ आरोपी थे, जिसमें से आठ पकड़े गए थे, जबकि मुकेश परिहार फरार था। इसी मामले में उसे पकड़ा गया था। बहोड़ापुर थाने में यह एफआइआर दर्ज थी, बहोड़ापुर पुलिस उसे पकडऩे में असफल हो गई थी।
आरोपी मुकेश परिहार दिल्ली में नाम बदलकर रह रहा था, उसने खुद को मृत घोषित कर दिया था। ग्वालियर में रिश्तेदार, पड़ोसी और सभी परिचितों को परिवार वालों ने यही बताया था कि वह मर चुका है। पुलिस जब भी उसे पकडऩे जाती थी तो बोलते थे, उसकी तो मौत हो गई। जबकि वह दिल्ली में मिस्त्री बन गया था, नाम बदलकर रह रहा था। क्राइम ब्रांच को जब टास्क मिला तब दोबारा उसकी फाइल खोली। बहोड़ापुर पुलिस ने तो उसकी फाइल ही बंद कर दी थी। क्राइम ब्रांच को टास्क मिला तो करीब एक महीने की मशक्कत के बाद उसे दबोच लिया गया। उसे पकड़कर बहोड़ापुर पुलिस के सुपुर्द कर दिया। बहोड़ापुर पुलिस को ही उसे कोर्ट में पेश करना था।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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