मंदिरों पर लगी लंबी-लंबी कतार, पिण्ड भरकर पहुंच रहे भक्त
Oct 02 2022
ग्वालियर। जगत जननी आदि शक्ति मां दुर्गा की भक्ति के लिए देवी मंदिरों में निरंतर आस्था का दरबार लगा हुआ है। मंदिरों में अनुष्ठान चल रहे हैं और जगह-जगह भंडारे शुरू हो गए हैं। बाजारों में स्टॉल लगाकर भक्तों को बाजार समितियों द्वारा प्रसादी वितरित की जा रही है। सुबह से लेकर देर रात तक सिंह वाहिनी के जयकारे घरों, गलियों और पंडालों में गूंज रहे हैं।
जगह-जगह जगराते हो रहे हैं और भजन संध्याएं आयोजित की जा रही हैं। मंदिरों में भक्तों की सुबह की शुरुआत मंदिरों में माता को जल अर्पित करने से हो रही है। विभिन्न मंदिरों और पंडालों में अनुष्ठान हो रहे हैं। देर रात तक भक्त पूजा-अर्चना करते हुए मनोकामनाएं मांग रहे हैं। शारदीय नवरात्रि का आज सातवां दिन था और देवी मंदिरों में भक्तों की अपार भीड़ लगी हुई है। भक्त रविवार को माता कालरात्रि की आराधना में जुटे हुए हैं। भीड़ का आलम यह है कि मंदिरों में पहुंचने वाले भक्तों को माता के दर्शन करने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
शहर से लगभग 15 किमी दूर शीतला माता मंदिर पर भक्तों की भारी भीड़ लगी हुई है। शहर के अलावा मुरैना सहित आसपास के गांव के लोग भी शीतला माता के दर्शन करने के लिए टोलियों के रूप में पहुंच रहे हैं। ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और यात्री वाहनों से मंदिर पहुंच रहे हैं तो कई लोग देवी दर्शन करने के लिए पैदल-पैदल जा रहे हैं। आलम यह है कि शीतला माता के दर्शन के लिए रात गहराते ही सड़कों पर भक्तों का हुजूम दिखाई दे रहा है और वह जगत जननी के दर्शन करते हुए मनोकामनाएं मांग रहे हैं।
अब तीन दिन रहेंगे महत्वपूर्ण
दुर्गाअष्टमी, नवमी व दशहरा का विशेष महत्व है। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया अष्टमी के दिन दिन मां आदिशक्ति के अष्टम स्वरूप देवी महगौरी का पूजन किया जाएगा। अष्टमी तिथि पर व्रत रखने वाले हवन कर कन्यायों का पूजन करेंगे। अष्टमी तिथि परम कल्याणकारी और यश-कीर्ति व समृद्धि दिलाने वाली मानी गई है। इसके साथ ही अष्टमी तिथि पर शस्त्र पूजन भी किया जाता है।
आज आठवें दिन होगी महागौरी की पूजा
देवीभागवत पुराण के अनुसार महागौरी वर्ण पूर्ण रूप से गौर अर्थात सफेद हैं और इनके वस्त्र व आभूषण भी सफेद रंग के हैं। मां का वाहन वृषभ अर्थात बैल है। मां के दाहिना हाथ अभयमुद्रा में है और नीचे वाला हाथ में दुर्गा शक्ति का प्रतीक त्रिशुल है। महागौरी के बाएं हाथ के ऊपर वाले हाथ में शिव का प्रतीक डमरू है। डमरू धारण करने के कारण इन्हें शिवा भी कहा जाता है। मां के नीचे वाला हाथ अपने भक्तों को अभय देता हुआ वरमुद्रा में है। माता का यह रूप शांत मुद्रा में ही दृष्टिगत है। इनकी पूजा करने से सभी पापों का नष्ट होता है। गौरी रूप में माता अपने हर भक्त का कल्याण करती हैं और उनको समस्याओं से मुक्त करती हैं। जो व्यक्ति किन्हीं कारणों से नौ दिन तक उपवास नहीं रख पाते हैं, उनके लिए नवरात्र में प्रतिपदा और अष्टमी तिथि को व्रत रखने का विधान है। इससे नौ दिन व्रत रखने के समान फल मिलता है।
संपादक
Rajesh Jaiswal
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