सुबह से लेकर रात तक पंडालों में गूंज रहे माता के भजन

Sep 29 2022

ग्वालियर। सिंहवाहिनी मां दुर्गा के दर्शन करने के लिए भक्तों की भीड़ तड़के से ही मंदिरों में पहुंच रहे हैं। शारदीय नवरात्रि का गुरूवार को चौथा दिन था और मंदिरों में भगवती जागरण सहित धार्मिक कार्यक्रम किए जा रहे थे। व्रतधारी अखण्ड जोत जलाकर मनोकामनाएं मांग रहे हैं तो वहीं इनका उत्साह जैसे-जैसे नवरात्रि के दिन बीतते जा रहे हैं बढ़ता जा रहा है। शहर के देवी मंदिरों में जहां भक्तों की अपार भीड़ भोर होते ही लगना शुरु हो जाती है और देर रात तक लगी रहती है तो वहीं शहर से दूर सांतऊ स्थित शीतला माता मंदिर पहुंचकर महामाई के दर्शन कर रहे हैं।
रात 10 बजते ही भक्तों का हुजूम जय माता दी के जयकारे के साथ शीतला माता के दर्शन के लिए पैदल पहुंचना शुरू कर देते हैं और भोर होते ही पहली आरती कर मनोकामना मांग रहे हैं। शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन मंदिरों में अनुष्ठान हुए और पंडालों में भजन कीर्तन करते हुए भक्त महामाई को मनाने के लिए आरती कर रहे हैं। शाम गहराते ही जगत जननी को मनाने के लिए देवी जागरण के आयोजन किए जा रहे हैं। मंदिरों में दर्शनार्थियों की भोर होते ही कतारें लग रही हैं और जय माता दी की गूंज के साथ देर रात तक दर्शन करते हुए महामाई से परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं।
आज नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंधमाता की पूजा की जाएगी
स्कंधमाता ममता की मूर्ति प्रेम और वात्सल्य की प्रतीक साक्षात दुर्गा का स्वरूप हैं। मां के 5वें स्वरूप को यह नाम भगवान कार्तिकेय से मिला है। मां दुर्गा इस रूप में कुमार कार्तिकेय को जन्म देने के कारण स्कंधमाता कहलाईं।
ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि मां के इस रूप की चार भुजाएं हैं और इन्होंने अपनी दाएं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंध अर्थात कार्तिकेय को गोद में लिया हुआ है। इसी तरफ वाली निचली भुजा के हाथ में कमल का फूल है। बाईं ओर की ऊपर वाली भुजा में वरदमुद्रा है और नीचे दूसरा श्वेत कमल का फूल है। सिंह इनका वाहन है, क्योंकि यह सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं इसलिये इनके चारों ओर सूर्य सदृश अलौकिक तेजोमय मंडल सा दिखाई देता है। सर्वदा कमल के आसन पर स्थित रहने के कारण इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है। जिन लोगों को संतान प्राप्ति में बाधा आ रही हो, उन्हें मां के इस स्वरूप की पूजा करनी चाहिए।