नवरात्रि के तीसरा दिन भक्तों ने मां चंद्रघंटा पूजा की

Sep 28 2022

ग्वालियर। मातारानी की आराधना के महापर्व नवरात्रि के तीसरे दिन  बुधवार को भक्तों ने मां चंद्रघंटा की पूजा अर्चना की। नवदुर्गा के चलते जगत जननी का दरबार भक्ति की जोत से जगमगा रहा है। पण्डालों में धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं। वहीं मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। कई स्थानों पर देवी मैया के जवारे बोए गए हैं। भक्ति की शक्ति मां दुर्गा की आराधना में शहर लीन है।
सूरज की किरण फूटने से पहले ही भक्त महामाई के जयकारे लगाते हुए मंदिरों में पहुंचकर भक्ति भाव के साथ आरती कर मनोकामनाएं मांग रहे हैं। नवरात्रि पर हर रोज शुभ मुहूर्त में सिंहवाहिनी मां दुर्गा की आराधना की जा रही है। पंडालों में धार्मिक आयोजन हो रहे हैं।
आदि शक्ति मां दुर्गा की आराधना में शहर लीन है और महामाई के जयकारे लगाते हुए भक्त भक्ति की शक्ति मां दुर्गा की आराधना करने के लिए बुधवार को सुबह 4 बजे से ही शहर के देवी मंदिरों में पहुंचकर मनोकामनाएं मांग रहे हैं। नवरात्रि के तीसरे दिन सुबह से ही भारी भीड़ भक्तों की देवी मंदिर मांढरे की माता, नहर वाली माता, वैष्णो देवी, मां मंशा देवी, पहाड़ों वाली माता, भेलसे वाली माता, शीतला माता, महलगांव करौली वाली माता, मरी माता, काली मंदिर आमखो, हाइकोर्ट, खेड़ापति कॉलोनी में भक्त पहुंचकर पूजा अर्चना की।
कन्याओं को माता का स्वरूप मानकर किया पूजन
उपनगर ग्वालियर स्थित संकट मोचन हनुमान बालाजी मंदिर में 51 कन्याओं का पूजन किया गया। यहां पर भक्तों ने कन्याओं को चुनरी ओढ़ाकर प्रसादी वितरित की। इसके बाद कन्याओं के चरण छूकर आशीर्वाद लिया। मंदिर के सेवक जगबीर दास ने बताया कि हिंदू धर्म में नवरात्र के दूसरे दिन छोटी-छोटी कन्याओं को देवी मां की तरह पूजा गया है।
आज मां कूष्मांडा की पूजा 
नवरात्रि के चौथे दिन आज गुरूवार 29सितंबर को मां कूष्मांडा की पूजा
और अर्चना की जाएगी। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि इनकी पूजा से भक्तों के सभी रोग नष्ट होते हैं। मां कूष्मांडा की भुजाओं में बाण, चक्र, गदा, अमृत कलश, कमल और कमंडल सजे हैं। वहीं दूसरी भुजा में वह सिद्धियों और निधियों से युक्त माला धारण किए हुए हैं। मां कूष्मांडा की सवारी सिंह हैं। कूष्मांडा का अर्थ है कुम्हड़े। मां को बलियों में कुम्हड़े की बलि सबसे ज्यादा प्रिय है। इसलिए इन्हें कूष्मांडा देवी कहा जाता है।